Recent Posts

यह हमारा स्वयं का चुना हुआ भ्रम है

आज वंदना शुक्ल की कविताएँ– जानकी पुल.  (१) भ्रम बहुत ऊँचाइ पे बैठी कोई खिड़की  बुहार देती हैं उन सपनों को जो बिखरते हैं हमारे भीतर झरते हुए पत्तों की तरह बाँहों में ले बहलाती हैं विविध दृश्यों से उन खिलौनों की तरह  जो सच से लगते हैं पर होते …

Read More »

पुरुषोत्तम अग्रवाल की कहानी ‘चेंग-चुई’

‘प्रगतिशील वसुधा’ के नए अंक में पुरुषोत्तम अग्रवाल की कहानी प्रकाशित हुई है. मूलतः आलोचक पुरुषोत्तम जी ने कविताएँ भी लिखी हैं. भाषा के धनी इस लेखक की यह कहानी मुझे इतनी पसंद आई कि पढते ही आपसे साझा करने का मन हो आया- प्रभात रंजन  ============================== ‘यह मकबरा सा …

Read More »

बड़ा अजूबा रंग-मंच है, बदला-बदला सबका वेश

हिंदी के वरिष्ठ कवि उमेश चौहान का काव्य संग्रह आया है ‘जनतंत्र का अभिमन्यु’. प्रस्तुत है उसी संग्रह से कुछ चुनी हुई कविताएँ. संग्रह भारतीय ज्ञानपीठ से आया है- जानकी पुल.  ==================================================== 1.         १.       मौन कौन सा संकोच या स्वार्थभय अथवा भ्रमरखता है मौन हमेंअपनी आँखों के सामने …

Read More »