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प्रेमचंद की परंपरा से क्या तात्पर्य है?

विद्वान् लेखक अपूर्वानंद ने हाल में संपन्न हुई ‘हंस’ की सालाना गोष्ठी और उसमें शामिल न होने को लेकर प्रसिद्ध राजनीतिक कार्यकर्ता एवं कवि वरवर राव के बयान को लेकर अपने इस लेख में कुछ गंभीर सवाल उठाये हैं. उनके ऊपर बहस होनी चाहिए तथा उनके जवाब भी ढूंढे जाने …

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औरंगजेब, दारा, लाहौर और रिश्तों के अँधेरे

मोहसिन हामिद समकालीन पाकिस्तानी अंग्रेजी लेखन का जाना-माना नाम है. अभी उनके मशहूर उपन्यास ‘रिलक्टेंट फण्डामेंटलिस्ट’ पर फिल्म भी आई थी. उनके पहले उपन्यास ‘मोथ स्मोक’ का अनुवाद पेंगुइन से प्रकाशित हुआ है ‘जल चुके परवाने कई’ नाम से. अनुवाद मैंने किया है. कई अर्थों में यह उपन्यास समकालीन पाकिस्तानी …

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विचारोत्तेजक बात यही है कि हम अब भी विचार नहीं करते

हाल के दिनों में आभासी दुनिया और प्रिंट मीडिया में जो सबसे गंभीर साहित्यिक बहस चली है वह कवि कमलेश के ‘समास’ में प्रकाशित साक्षात्कार तथा उसमें आये एक तथाकथित विवादास्पद बयान को लेकर चली. यह कुछ ऐसी बहसों में से है जिसने हिंदी साहित्य के दो ध्रुवान्तों को स्पष्ट …

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