Recent Posts

हमारी ज़ोहरा आपा

आज जोहरा सहगल ने अपने जीवन का शतक पूरा कर लिया. उनके जीवन और कला के सफर पर दिलनवाज ने एक नजर डाली है- जानकी पुल. ———————————————- कई सितारों को मैं जानता हूं  कहीं भी जाऊं मेरे साथ चलते हैं.. (शायरी के एक संस्करण से) उत्तरांचल के मुमताज़उल्लाह खान रोहिला पठान परिवार …

Read More »

क्या सचमुच लेखक की भूमिका भौंकते हुए कुत्ते सरीखी है?

साहित्यिक पत्रिका ‘तद्भव’ द्वारा लखनऊ में 21 व 22 अप्रैल को सेमिनार का आयोजन हुआ, जिसमें आदरणीय नामवर सिंह और श्री काशीनाथ सिंह के वक्तव्यों को लेकर बड़ा बवाल हुआ. नामवर जी ने कहा कि सत्ता के समक्ष साहित्यकार की हैसियत कांता यानी जोरू जैसी है तथा काशीनाथ जी ने …

Read More »

‘कहानी’ में न अंटने वाला कहानीकार उदय प्रकाश

संजीव कुमार हिंदी के गंभीर आलोचकों में गिने जाते हैं. हाल के वर्षों में जिन कुछ आलोचकों को मिलने के कारण देवीशंकर अवस्थी सम्मान की विश्वसनीयता बरकरार है, वे उनमें एक हैं. बहुत खुलेपन के साथ उन्होंने उदय प्रकाश की कहानियों, उनकी कथा-प्रविधि पर लिखा है. उदय प्रकाश को पढ़ने …

Read More »