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देखना होगा कि ऐसे कटघरे कहाँ-कहाँ हैं?

वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी के लेख पर पहले कवि-संपादक गिरिराज किराडू ने लिखा. अब उनके पक्ष-विपक्षों को लेकर कवि-कथाकार-सामाजिक कार्यकर्ता अशोक कुमार पांडे ने यह लेख लिखा है. इनका पक्ष इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि श्री मंगलेश डबराल अपनी ‘चूक’ संबंधी पत्र इनको ही भेजा था और फेसबुक पर …

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संतों घर में झगरा भारी!

कल हमने जनसत्ता संपादक ओम थानवी का लेख ‘आवाजाही के हक में‘ जनसत्ता से साभार लगाया था. फेसबुक और ब्लॉग्स पर गुंटर ग्रास की कविता, विष्णु खरे और मंगलेश डबराल को लेकर चली बहसों के सन्दर्भ में उस लेख में जो सवाल उठाये गए उसने उन बहसों को एक बात फिर बहसतलब …

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आवाजाही के हक में

आज ‘जनसत्ता’ के संपादक ओम थानवी ने ‘अनंतर’ में  इंटरनेट माध्यम पर चली कुछ बहसों के माध्यम से इस माध्यम पर एक विचारपरक लेख लिखा है. आपसे साझा कर रहा हूं- जानकी पुल. ———————————————————————————— इंटरनेट बतरस का एक लोकप्रिय माध्यम बन गया है। घर-परिवार से लेकर दुनिया-जहान के मसलों पर …

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