Recent Posts

पुरुष थमाते है स्त्री के दोनों हाथों में अठारह तरह के दुःख

दुर्गा के बहाने कुछ कविताएँ लिखी हैं युवा कवयित्री विपिन चौधरी ने. एक अलग भावबोध, समकालीन दृष्टि के साथ. कुछ पढ़ी जाने वाली कविताएँ- जानकी पुल. ================================== 1  एक युग में  ब्रह्मा, विष्णु, शिव थमाते है तुम्हारे अठारह हाथों में अस्त्र शस्त्र  राक्षस वध  की अपूर्व सफलता के लिये सौंपते हैं   शेर की नायाब सवारी   …

Read More »

सचमुच आराम से चली गयी माँ

शिवमूर्ति हमारे समय के बेहतरीन गद्यकार हैं. उनके गद्य में जीवन को महसूस किया जा सकता है, इतना जीवंत गद्य. अभी हाल में ही अपनी माँ को याद करते हुए उन्होंने कुछ लिखा, कई बार पढ़ा. जब-जब पढ़ा आँखें छलछला गई. यह महज संयोग है कि अभी इसे यहाँ पोस्ट …

Read More »

भारतीय भाषाओं का ‘समन्वय’

‘समन्वय’ के पुराने आयोजन का एक सत्र  इण्डिया हैबिटेट सेंटर के वार्षिक साहित्यिक आयोजन ‘समन्वय’ का आयोजन इस बार 24-27 अक्टूबर 2013 को हो रहा है. प्रस्तुत है कार्यक्रम की विस्तृत रुपरेखा- जानकी पुल.  ============================================== 20 से ज्यादा भाषाएँ और बोलियां,90 से अधिक वक्ता नई दिल्ली. 9अक्टूबर 2013. तीसरा  समन्वय: …

Read More »