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हमें फिर खुदा ने दिखाई बसंत

नजीर अकबराबादी की नज्मों के साथ सबको वसंतपंचमी मुबारक- जानकी पुल. १. फिर आलम में तशरीफ़ लाई बसंत हर एक गुलबदन ने मनाई बसंत तवायफ ने हरजां उठाई बसंत इधर औ उधर जगमगाई बसंत हमें फिर खुदा ने दिखाई बसंत मेरा दिल है जिस नाज़नीं पे फ़िदा वो काफिर भी …

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वे लोग, वह युग, वह दुनिया कहाँ चली गई?

आज हिंदी के उपेक्षित कवि जानकीवल्लभ शास्त्री ९५ साल के हो गए. इस अवसर पर उनके शतायु होने की कामना के साथ प्रस्तुत है यह संस्मरणात्मक लेख जिसे कवयित्री रश्मिरेखाजी ने लिखा है- जानकी पुल. हमारा मुज़फ्फरपुर शहर मीठी लीचियों के साथ-साथ आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री के लिए भी जाना जाता है. शास्त्रीजी की …

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फिराक गोरखपुरी की एक दुर्लभ कहानी ‘रैन-बसेरा’

उर्दू के मशहूर शायर फ़िराक गोरखपुरी की शायरी के बारे में किसी को बताने की ज़रूरत नहीं, सब जानते हैं कि वे किस पाए के शायर थे. उनको अपनी शायरी के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार भी मिला था. लेकिन यह कम लोग जानते हैं कि उन्होंने कुछ कहानियां भी लिखी थीं. …

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