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हम अनाप-शनाप क्यों नहीं लिखते?

प्रदीपिका सारस्वत इन दिनों कुमाऊँ में रह रही हैं। वहीं से उन्होंने डायरीनुमा लिखकर भेजा है। जिसे उन्होंने नाम दिया है अनाप-शनाप। आप भी पढ़िए। पहाड़ों में खिले खिले धूप में चमकते फूलों सा गद्य- ============= रात को सोते वक्त तकिए से कहा था कि सुबह जल्दी जागना है, सूरज …

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कलाकार जीवन भर एक ही कृति बनाता है: सीरज सक्सेना

जाने माने चित्रकार, सेरेमिक कलाकार, लेखक सीरज सक्सेना के साथ कवि-कला समीक्षक राकेश श्रीमाल की बातचीत की किताब आई है ‘मिट्टी की तरह मिट्टी’। सेतु प्रकाशन से प्रकाशित इस किताब का एक अंश पढ़िए- ================ राकेश श्रीमाल– मिट्टी में काम शुरू करने के बहुत पहले, यानी बचपन में मिट्टी से …

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दलित लेखकों  के मारक  सवाल: सुरेश कुमार

युवा आलोचक सुरेश कुमार के लेख हम सब पढ़ते रहे हैं और उनकी दृष्टि के क़ायल भी रहे हैं। उनका यह लेख पाखी पत्रिका के जनवरी-फ़रवरी 2021 के अंक में प्रकाशित हुआ था। इस लेख को पत्रिका की तरफ़ से देश विशेषांक प्रतियोगिता में पुरस्कृत भी किया गया है। जिन …

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