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किताबों और फिल्मों में कुछ शास्त्रीय और शाश्वत होते हैं, कुछ वक़्ती!

हिंदी में लोकप्रिय और गम्भीर साहित्य की बहस बहुत पुरानी रही है। इसी को अपने इस लेख में रेखांकित किया है युवा लेखिका सुदीप्ति ने। उन्होंने अनेक उदाहरणों के साथ अपनी बात रखी है, जो सोच-विचार और बहस की माँग करती है। इस विषय पर आपके विचार भी आमंत्रित हैं। फ़िलहाल …

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प्रियदर्शी ठाकुर ‘ख़याल’ की ग़ज़लें

प्रियदर्शी ठाकुर ख़याल इन दिनों अपने उपन्यासों के कारण चर्चा में हैं लेकिन वे मूलतः ग़ज़लगो रहे हैं। आइए उनकी कुछ चुनिंदा ग़ज़लें उनके आत्मकथ्य के साथ पढ़ते हैं- ======================     पेशलफ्ज़ सन् १९७५ से शेर कहता आ रहा हूँ , और इस बरस पचहत्तर का हो जाऊँगा l …

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‘ठाकरे भाऊ’ पुस्तक का एक अंश

आज भारतीय राजनीति के सबसे रहस्यमय नेताओं में एक बाल ठाकरे की 95 वीं जन्मतिथि है। वे कभी किसी पद पर नहीं रहे लेकिन मुंबई के सबसे शक्तिशाली नेता बने रहे। हिंदुत्ववादी राजनीति की एक मज़बूत धुरी रहे। उनके परिवार और विशेषकर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की राजनीतिक यात्रा …

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