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आगबबूला और झागबबूला

विनोद खेतान की किताब ‘उम्र से लंबी सड़कों पर’ की समीक्षा कुछ दिनों पहले प्रियदर्शन ने लिखी थी, जिसके बहाने उन्होंने गुलजार का गीतकार के रूप में एक मूल्यांकन भी करने की कोशिश की थी. उसका एक प्रतिवाद कल ‘जनसत्ता’ में निर्मला गर्ग का छपा था. यह प्रियदर्शन का जवाब …

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नामवर सिंह की कविताएँ

हाल में ही राजकमल प्रकाशन से एक किताब आई है ‘प्रारंभिक रचनाएं’, जिसमें नामवर सिंह की कुछ शुरूआती रचनाओं को संकलित किया गया है. संपादन भारत यायावर ने किया है. उसमें नामवर जी की कुछ आरंभिक कविताएँ भी हैं. उसी में से कुछ चुनी हुई कविताएँ आपके लिए- जानकी पुल. ==================================================  …

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दिल ये कहता है कोई याद शहर बाक़ी है

युवा लेखक त्रिपुरारि कुमार शर्मा ने नीलेश मिश्रा के ‘याद शहर’ की एक अच्छी समीक्षा लिखी है. आप भी पढ़िए शायद अच्छी लगे- जानकी पुल. ========================= मशहूर विचारक ‘बेकन’ का कथन है, “कुछ किताबें चखने के लिए होती हैं, कुछ निगल जाने के लिए। और कुछ थोड़ी-सी चबाने और पचाने …

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