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वर्तिका नंदा की कुछ नई कविताएँ

वर्तिका नंदा की कविताएँ मुखर बयान की तरह लगती हैं. उनका अपना मुहावरा है और कई बार उनके काव्य-विषय भी काफी अलग होते हैं. आज उनकी कुछ नई कविताएँ- जानकी पुल. =========================================================== निर्भया औरत होना मुश्किल है या चुप रहना जीना या किसी तरह बस, जी लेना शब्दों के टीलों …

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उसकी आवाज़ मेरे जीवन का एकमात्र दृश्य है

मेरा मन था कि बाबुषा पर कुछ अलग से लिखूं . उसे पढ़ना एक ऐसे कीमियागर के पास बैठना है,जो दुःख की मिट्टी उठाता है तो टीस के सारे मुहाने खुल जाते हैं और सुख यहाँ इस तरह आता है जैसे अप्रत्याशित घटना -कि आप चकित हैं और चकित हैं …

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और हँसी निष्कासित है अपने समय से

वरिष्ठ पत्रकार-लेखिका गीताश्री इन दिनों ‘कविया’ गई हैं. पिछले कुछ सालों में कुछ(सारी नहीं) अच्छी कहानियां लिखने के बाद उन्होंने अभिव्यक्ति का खतरा कविता में उठाया है. अब देखिये न क्या तासीर है इन कविताओं की कि जबसे इनको जानकी पुल पर लगाने के बारे में सोचा है रात से …

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