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लियो री बजंता ढोल

कवि-लेखक प्रेमचंद गाँधी ने अपने इस लेख में यह सवाल उठाया है कि लेखिकाएं साहित्य में अपने प्रेम साहित्य के आलंबन का नाम क्यों नहीं लेती हैं? एक विचारोत्तेजक लेख- जानकी पुल. ====================== मीरा ने जब पांच शताब्‍दी पहले अपने प्रेमी यानी कृष्‍ण का नाम पुकारा था तो वह संभवत: …

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साहित्य एक टक्कर है। एक्सीडेंट है।

प्रसिद्ध आलोचक सुधीश पचौरी ने इस व्यंग्य लेख में हिंदी आलोचना की(जिसे मनोहर श्याम जोशी ने अपने उपन्यास ‘कुरु कुरु स्वाहा’ में खलीक नामक पात्र के मुंह से ‘आलू-चना’ कहलवाया है) अच्छी पोल-पट्टी खोली है. वास्तव में रचनात्मक साहित्य की जमीन इतनी बदल चुकी है कि हिंदी आलोचना की जमीन …

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उनके गीत कभी पुराने नहीं पड़े

शमशाद बेगम को श्रद्धांजलि देते हुए प्रसिद्ध लेखक-पत्रकार प्रियदर्शन का यह लेख उनकी गायकी के महत्व को रेखांकित करता है. प्रियदर्शन ने यह लेख ख़ास तौर पर जानकी पुल के लिए लिखा है, जानकी पुल उनके प्रति आभार व्यक्त करता है- जानकी पुल. =================================== आम तौर पर हिंदी फिल्मों में …

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