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‘लोकप्रिय’ लेखक को महत्वपूर्ण सम्मान

बड़े साहित्यिक पुरस्कार ‘महत्वपूर्ण’ साहित्य को मिलना चाहिए या ‘लोकप्रिय’ साहित्य को. वर्ष २०११ का प्रतिष्ठित मैन बुकर प्राइज़ जूलियन बर्न्स के उपन्यास ‘द सेन्स ऑफ एंडिंग’ को मिलने से यह बहस छिड़ गई है. कोई भी पुरस्कार सभी साहित्यिकों की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरा नहीं उतर सकता है. …

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जो ‘कूल’ होते हैं वे हिंदी के नॉवेल नहीं पढ़ते

चेतन भगत इस समय भारत में अंग्रेजी के निस्संदेह सबसे ‘लोकप्रिय’ लेखक हैं. सबसे बिकाऊ भी. जो बोल देते हैं वही चर्चा का सबब बन जाता है. पिछले दिनों उनका एक बयान मुझे भी अच्छा लगा था. उन्होंने इन्फोसिस के नारायणमूर्ति को ‘बॉडीशॉपिंग’ करने वाला करार दिया था. नारायणमूर्ति ने …

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विनम्र कवि को नोबेल

कवि-संपादक गिरिराज किराडू ने यह लेख टोमास ट्रांसट्रोमर की कविता और उनको मिले नोबेल सम्मान पर लिखा है. यह छोटा-सा लेख न केवल ट्रांसट्रोमर की कविता को समझने में हमारी मदद  करती है बल्कि नोबेल की पोलिटिक्स की ओर भी संकेत करती है. बेहद पठनीय लेकिन विद्वत्तापूर्ण लेख- जानकी पुल.  …

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