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जब इंडिया गेट के माथे पर मोमबत्तियाँ जलती हैं

युवा कवि त्रिपुरारि कुमार शर्मा की ये कविताएँ हमें कुछ सोचने के लिए विवश कर देती हैं, हमारी मनुष्यता पर सवाल उठती हैं- जानकी पुल. ============================      1. वाल ऑफ़ डेमोक्रेसी   जब इंडिया गेट के माथे पर मोमबत्तियाँ जलती हैं  तो उसकी सुगंध में सनक उठता है ‘जंतर-मंतर’ …

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जो न फरेब खाते हैं न फरेब देते हैं

वरिष्ठ कवि-आलोचक विष्णु खरे ने चंद्रकांत देवताले के साहित्य अकादेमी सम्मान पर एक अच्छी टिप्पणी की है, हालांकि अपनी खास कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना शैली में- जानकी पुल. =============================================== अब जबकि मेरे दोनों प्रिय वरिष्ठ कवियों विनोदकुमार शुक्ल और चंद्रकांत देवताले को साहित्य अकादमी पुरस्कार मिल चुका है, …

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देश के साथ मेरे बेटे ने भी प्रश्‍न पूछना शुरू कर दिया है

युवा कवि रविभूषण पाठक ने नए साल की बधाई कुछ इस तरह से दी है- जानकी पुल. ========================================================= नया साल भी बेमौका ही आता है जबकि पछता फसल भी पहुंच जाती है घर खलिहान में चूहों तक के लिए दाने नहीं और देश गोबर में से भी दाना निकाल चुका …

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