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कुछ गौर से कातिल का हुनर देख रहे हैं

युवा लेखक चंदन पाण्डेय ऐसे लेखकों में हैं जो विभिन्न मसलों पर अपनी स्पष्ट राय समय-समय पर जाहिर करते रहे हैं. इस बार उन्होंने फांसी और उसको लेकर चल रही राजनीति पर लिखा है- जानकी पुल. ================================================================ दाग का एक पयाम है :  ” कुछ देख रहे हैं दिल-ए-बिस्मिल का …

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अंगुरी में डँसले बिया नगिनिया

‘खूंटा’ कहानी से विशेष चर्चा में आए अनुज की कहानी में राजनीति और ग्रामीण समाज का बदलता चेहरा बखूबी आता है. यह कहानी बिहार की जातिवादी राजनीति को कई कोणों से देखने-समझने की मांग करती है. कथादेश में प्रकाशित हुई है. आज आपके लिए- जानकी पुल. =================================================== {“यह कहानी देशभर …

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जाति मुक्ति इसी रास्‍ते से संभव है

प्रेमपाल शर्मा संवेदनशील लेखक हैं औ अपने विचार निर्भीकता से रखने के लिए जाने जाते हैं. आज जाति व्यवस्था पर उनका यह लेख पढ़िए- जानकी पुल. ================================       आखिर गलती कहॉं हुई ? मेरा मन पिछले कुछ बरसों  से बार-बार स्‍वयं को टटोल रहा है । सरकारी दफ्तर …

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