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पटाक्षेप अभी नहीं

कवि-आलोचक, प्रतिलिपि.इन के संपादक गिरिराज किराड़ू ने आज जनसत्ता में प्रकाशित अपने लेख में कुलपति-नया ज्ञानोदय प्रकरण और उसके प्रति लेखक समाज की नाराज़गी की प्रकृति, उसमें अन्तर्निहित पहलुओं को बड़े वैचारिक परिप्रेक्ष्य में देखा है. साथ ही, कुछ ऐसे ज़रूरी सवाल इस लेख में उठाये गए हैं जिनके जवाब …

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बेदिल की मुश्किल: असद ज़ैदी

इस आयोजन के तो नागरजी मैं सख़्त ख़िलाफ़ हूँ लिखित में कोई बयान पर मुझसे न लीजिये मैं जो कह रहा हूँ उसी में बस मेरी सच्ची अभिव्यक्ति है वैसे भी मौखिक परंपरा का देश है यह जीभ यहाँ कलम से ज़्यादा ताकतवर रहती आयी है नारे से ज़्यादा असर …

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असंभावित की संभावना का लेखक

पुर्तगाल के नोबेल पुरस्कार विजेता लेखक जोसे सरामागो का हाल में ही निधन हो गया. उनके जीवन और साहित्य पर यह लेख मैंने कादम्बिनी पत्रिका के लिए लिखा था. जो उसके अगस्त अंक में प्रकाशित हुआ है-प्रभात रंजन जोसे सरामागो डॉट ब्लॉस्पॉट डॉटकॉम– सतासी साल की उम्र में दिवंगत हुए …

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