Home / Tag Archives: अनुकृति उपाध्याय

Tag Archives: अनुकृति उपाध्याय

अनुकृति उपाध्याय के कथा संग्रह ‘जापानी सराय’ की भूमिका

अनुकृति उपाध्याय हिंदी कहानीकारों की जमात में नई हैं लेकिन उनकी कहानियां बहुत अलग तरह की हैं. उनका पहला कथा संग्रह राजपाल एंड संज से प्रकाशित हुआ है ‘जापानी सराय’. जिसकी भूमिका लिखी है सुप्रसिद्ध कथाकार हृषिकेश सुलभ ने. फिलहाल आप भूमिका पढ़िए- मॉडरेटर ========= समकालीन हि‍न्‍दी कहानी का परि‍दृश्‍य …

Read More »

मैं अब कौवा नहीं, मेरा नाम अब कोयल है!

युवा लेखिका अनुकृति उपाध्याय उन चंद समकालीन लेखकों में हैं जिनकी रचनाओं में पशु, पक्षी प्रकृति सहज भाव से उपस्थित रहते हैं. यह उनकी ताज़ा रचना है मौसम और परिस्थिति के अनुकूल- मॉडरेटर ============ पतझड़ बनाम वसंत मेरी खिड़की पर अक़्सर एक कौवा आ बैठता है। बड़बोला है, कर्कश भी। …

Read More »

अनुकृति उपाध्याय की कविता ‘अभी ठहरो’

मीटू अभियान से प्रेरित यह कविता युवा लेखिका अनुकृति उपाध्याय ने लिखी है. आपके लिए- मॉडरेटर ========= अभी ठहरो अभी ठहरो अभी हमने उठाए ही हैं कुदालें, कोंचने , फावड़े हमें तोड़ने हैं अभी कई अवरोध ढहाने हैं मठ और क़िले विस्फोटों से हिलाने हैं पहाड़-सरीख़े वजूद तुम्हारे पैरों-तले की …

Read More »

अनुकृति उपाध्याय की कविता ‘अंधे’

कविता अपनी लक्षणा-व्यंजना के कारण महत्वपूर्ण बन जाती है, प्रासंगिक बन जाती है। हिन्दी अँग्रेजी दोनों भाषाओं में समान रूप से लेखन करने वाली अनुकृति उपाध्याय की यह कविता अच्छा उदाहरण है। किताबों के बहाने समकालीन राजनीति पर बहुत कुछ कह जाती है। अनुकृति की एक कहानी अभी ‘हंस’ में …

Read More »

अनुकृति उपाध्याय की कहानी ‘इंसेक्टा’  

अनुकृति उपाध्याय ने अनेक कहानियां अछूते विषयों पर लिखी हैं. जैसे यह कहानी ‘इन्सेक्टा’, कीड़ों को लेकर इतनी रोमांचक कहानी भी लिखी जा सकती है यह इसे पढ़कर जाना. ‘हंस’ के नए अंक में प्रकाशित इस कहानी को पढ़कर आश्वस्ति हुई कि बेस्टसेलर के हल्ले के बाहर भी हिंदी लेखन …

Read More »

अमूल्य शब्द पन्द्रह प्रतिशत सस्ते में मिल रहे हैं

अनुकृति उपाध्याय मुंबई में एक अंतरराष्ट्रीय वित्त संस्थान में काम करती हैं, नई जीवन स्थितियों को लेकर ख़ूबसूरत कहानियां लिखती हैं. सिंगापुर डायरी की यह उनकी तीसरी और आखिरी क़िस्त है. कितनी अजीब बात है एक ही शहर को अलग-अलग लेखकों की आँखों से देखने पर शहर अलग-अलग लगने लगता …

Read More »

सिंगापुर डायरी: 2: एक देश की जीवनशैली दूसरे देश की ज़रूरतमन्दी पर टिकी है

अनुकृति उपाध्याय हिंदी-अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लिखती हैं. उनका एक अंग्रेजी उपन्यास अगले साल प्रकाशित हो रहा है. एक अंतर्राष्ट्रीय वित्त संस्थान में काम करती हैं और उनकी कहानियों में समकालीन जीवन स्थितियों के कथानक हैं. इन दिनों सिंगापुर डायरी लिख रही हैं. यह उसकी दूसरी क़िस्त है- मॉडरेटर ========================================= …

Read More »

सिंगापुर शहर कम है, उपभोक्तावाद का मंदिर है

यात्राओं का मौसम चल रहा है. कोई कहीं जा रहा है, कोई लौट रहा है. युवा लेखिका अनुकृति उपाध्याय की कहानियां हम पढ़ते रहे हैं. इस बार वह सिंगापुर डायरी के साथ आई हैं. सिंगापुर की कुछ छवियाँ उनके सम्मोहक गद्य में पढ़िए- मॉडरेटर =============== सिंगापुर – १ “हम सिंगापुर …

Read More »

सबसे बड़ा जोखिम है मान लेना कि थोड़ी से हँसी की क़ीमत हैं

आज कुछ कविताएँ अनुकृति उपाध्याय की. अनुकृति एक अंतरराष्ट्रीय वित्त कम्पनी में काम करती हैं. मुंबई-सिंगापुर में रहती हैं. हिंदी में कहानियां और कविताएँ लिखती हैं. इनकी एक कहानी जानकी पुल पर आ चुकी है- जानकी और चमगादड़. जिसको कहने के अलग अंदाज के कारण काफी सराहा गया था. इनकी …

Read More »

अनुकृति उपाध्याय की कहानी ‘जानकी और चमगादड़’

अनुकृति उपाध्याय एक प्रतिष्ठित वित्त संस्थान में काम करती हैं. हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लिखती हैं.  यह कहानी बड़ी संवेदनशील लगी. बेहद अच्छी और अलग तरह के विषय पर लिखी गई. आप भी पढ़कर राय दीजियेगा- मॉडरेटर ========================================== पीपल का वह वृक्ष उस रिहायशी इमारत के विस्तृत प्रांगण …

Read More »