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Tag Archives: अमृता प्रीतम

मोमबत्ती दिलवाली रात भर जलती रही

सुरेन्द्र मोहन पाठक ने अपनी आत्मकथा के दूसरे खंड ‘हम नहीं चंगे बुरा न कोय’ में अमृता प्रीतम से मुलाक़ात का ज़िक्र किया। आत्मकथा के पहले खंड में उन्होंने इंद्रजीत यानी इमरोज़ के बारे में लिखा था, दूसरे खंड में भी उन्होंने लिखा है कि एक कलाकार के रूप में …

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इमरोज से वे कहतीं – आग तुम जलाओ और रोटी मैं बनाती हूँ

संस्मरण के इस भाग में फिर मिलते हैं इमरोज से। देखते हैं कि एक भावुक व्यक्ति, एक भावुक कलाकार कैसे प्रेम–प्यार, व्यक्ति, परिवार और समाज को देखता है। अमृता के विषय में लम्बी बातचीत करने के बाद जब इमरोज से मैंने उन दोनों की तस्वीरें मांगी, थोड़ी देर बाद ही …

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इंविटेशन एक नहीं, दो मंगाना मैं भी साथ चलूंगा – इमरोज

अमृता प्रीतम और इमरोज का रिश्ता, जिसने कभी भी, किसी तरह के सामाजिक बंधनों की परवाह नहीं की। उन्होंने अपनी जिंदगी को अपने तरीके से जिया, सिर्फ एक–दूसरे की परवाह करते हुए। वे एक ही छत के नीचे दो अलग–अलग कमरों में रहते थे। पत्रकार-अनुवादक संगीता के द्वारा इमरोज से …

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अमृता प्रीतम, गुलज़ार और ‘पिंजर’ का किस्सा

आज अमृता प्रीतम के जन्मदिवस पर हिंदुस्तान टाइम्स में गुलज़ार साहब का यह संस्मरण छपा है जो पंजाबी लेखिका निरुपमा दत्त से बातचीत पर आधारित है। मैंने झटपट अनुवाद किया है। पढ़िएगा। दिलचस्प है-  प्रभात रंजन =========================================================== मैंने पहली बार अमृता प्रीतम की प्रसिद्ध कविता ‘अज्ज अक्खा वारिस शाह नू’ …

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अमृता प्रीतम की कहानी ‘शाह की कंजरी’

अमृता प्रीतम की यह कहानी तवायफ संस्कृति कुछ सबसे अच्छी कहानियों में है. इसकी नायिका लाहौर के हीरा मंडी की है. समाज पर तवायफों का क्या असर होता था, उनका क्या जलवा होता था- कहानी इसको बड़े अच्छे तरीके से सामने लाती है- मॉडरेटर ======================================= उसे अब नीलम कोई नहीं …

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