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ईशान त्रिवेदी की कहानी ‘कंदील’

ईशान त्रिवेदी फ़िल्मी जगत के जाने माने नाम हैं। उनका पहला उपन्यास ‘पीपलटोले के लौंडे’ राजकमल प्रकाशन समूह से आया है। उनकी क़िस्सागोई और कथाभूमि दोनों प्रभावित करते हैं। जैसे कि इस कहानी में- मॉडरेटर =============== कंदील मेरी दादी की सबसे अच्छी दोस्त टुइंयाँ दादी विधवा और बहुत गरीब थीं। …

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ईशान त्रिवेदी के उपन्यास ‘पीपलटोले के लौंडे’ का एक अंश

ईशान त्रिवेदी फ़िल्मी दुनिया के चंद इल्मी लोगों में हैं जो बहुत अच्छा लिखते हैं और जिनका लेखन अपने साथ बहा ले जाता है। जानकी पुल पर उनकी कई कहानियाँ हम पढ़ चुके हैं। अभी उनका उपन्यास राजकमल प्रकाशन समूह से आया है ‘पीपलटोले के लौंडे’। प्रेम और अपराध कथा …

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ईशान त्रिवेदी की कहानी ‘सीय स्वयंवर कथा सुहाई’

ईशान त्रिवेदी फ़िल्म निर्देशक रहे हैं, फ़िल्मों टीवी के लिए पटकथाएँ लिखते रहे हैं, उनका एक उपन्यास प्रकाशित होने वाला है। लेकिन आजकल जानकी पुल के पाठकों के लिए उनकी एक के बाद एक कहानियाँ आ रही हैं। हर कहानी में उनके लेखन का एक नया ही रूप आता है। …

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ईशान त्रिवेदी की नई कहानी ‘उड़न’

ईशान त्रिवेदी की कहानियाँ एडिक्टिव होती हैं- एक पढ़िए तो दूसरी पढ़ने की तमन्ना जाग उठती है। यह उनकी नई कहानी है उनके आत्मकथ्य के साथ- ‘जो हाथ आया वो पढ़ लिया’ वाले अंदाज़ में बचपन से खासी जवानी तक काफी कुछ पढ़ लिया था। गुंटर ग्रास से लेके पैकेट्स …

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ईशान त्रिवेदी की कहानी ‘स्टील का बिल्ला’

एनएसडी के ग्रेजुएट, फ़िल्मों-टीवी की दुनिया के वरिष्ठ पेशेवर ईशान त्रिवेदी के छोटे छोटे क़िस्सों का मेरे ऊपर ग़ज़ब जादू हो गया है। हर बार एक ताज़ा अहसास से भर देती हैं उनकी कहानियाँ। जैसे इसी कहानी को लीजिए- मॉडरेटर ================================ मेरे घर कामरेड सुरजीत सिंह आ रहे थे। सी …

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ईशान त्रिवेदी की नई कहानी ‘एक चूहे की मौत’

ईशान त्रिवेदी फ़ेसबुक पर ईशान श्रिवेदी के नाम से हैं। टीवी-फ़िल्मों की दुनिया से ताल्लुक़ रखते हैं लेकिन मैं उनकी क़िस्सागोई का क़ायल होता जा रहा हूँ। कहाँ कहाँ से चुन चुन कर किससे लाते हैं। मत पूछिए। सुना है कि इनका एक उपन्यास जल्दी ही राजकमल प्रकाशन समूह से …

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ईशान त्रिवेदी की कहानी ‘ग्योलप्पा’

ईशान त्रिवेदी का ताल्लुक़ टीवी-फ़िल्मों में की दुनिया से है, सीनियर कलाकार हैं लेकिन मेरे जैसे लोग उनके लिखे के क़ायल हैं। अपने गद्य से समाँ बाँध देते हैं। मसलन यह पढ़िए, कहानी है या संस्मरण जो भी है पढ़ते ही दिल में बस जाता है- प्रभात रंजन =================================== राष्ट्रीय नाट्य …

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