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‘पीली छतरी वाली लड़की’ की काव्य समीक्षा

यतीश कुमार की काव्यात्मक समीक्षा इस बार उदय प्रकाश के उपन्यास ‘पीली छतरी वाली लड़की’ की है। पढ़कर बताइए कैसा लगा- =================== (‘पीली छतरी वाली लड़की’ ) ——————————————-   वह रोज आईने में पहले अपनी शक्ल देखता फिर समाज को अपनी शक्ल में खोजता   समाज के आईने से प्रतिबिम्ब …

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उदय प्रकाश की कविताएँ उनकी एक प्रशंसिका की पसंद

बरसों बाद उदय प्रकाश का कविता संग्रह आया है ‘अम्बर में अबाबील’। मैं उदय जी की नैरेटिव कविताई का क़ायल रहा हूँ। लेकिन वाणी प्रकाशन से प्रकाशित उनके इस संग्रह की कुछ कविताएँ उनकी प्रशंसिका कुमारी रोहिणी ने अपनी पसंद से चुनी हैं। आप भी पढ़िए- मॉडरेटर =================== 1. जलावतनी …

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एक ही देश में कई तरह की दिवाली है

आज उदय प्रकाश जी का यह लेख ‘दैनिक हिन्दुस्तान’ में आया है। दीवाली के बहाने एक सारगर्भित लेख, जिन लोगों ने न पढ़ा हो उनके लिए- मॉडरेटर ========================== जो लोग जरा-सा भी देश के पर्वों-त्योहारों की परंपरा, उनकी जड़ों, उनके इतिहास का ज्ञान रखते हैं, वे बिना उलझन कहेंगे कि …

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भारत भूषण पुरस्कार कवि का अवमूल्यन भी कर देता है !

पिछले कुछ सालों से युवा कविता के सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार मिलने के बाद बहस-विवाद की शुरुआत हो जाती है. बहस होना कोई बुरी बात नहीं है. भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार की शुरुआत साल की सर्वश्रेष्ठ युवा कविता को पुरस्कृत करने के लिए किया गया था. लेकिन साल …

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उदय प्रकाश की कविता ‘एक भाषा हुआ करती है’

उदय प्रकाश हिंदी के कवि बताये गए सारे कवियों से अधिक क्रिएटिव और समकालीन हैं. उनकी कविताओं में अपनी आवाज सुनाई देती है. नई सदी में उन्होंने हिदी कविता को एक नया मुहावरा दिया है. मातृभाषा दिवस के दिन उदय प्रकाश की इस कविता से अच्छा क्या पढना होगा- मॉडरेटर …

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उनकी हँसी एक नाचीज लेखक पर शक्तिशालियों की हँसी है!

उदय प्रकाश द्वारा साहित्य अकादेमी पुरस्कार वापस करने की घोषणा पर अनेक तरह की प्रतिक्रियाएं आई. अधिकतर विद्वानों ने उनके इस निर्णय का स्वागत किया, जबकि कुछ विद्वानों ने इसे उनकी भूरि-भूरि निंदा करने के एक और अवसर के रूप में लिया. आज जाने-माने लेखक अरुण महेश्वरी के विचार जानते …

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यह अवसर वाद-वाद खेलने का नहीं है मिलकर प्रतिवाद करने का है!

कन्नड़ लेखक कलबुर्गी की नृशंस हत्या ने एक ऐसा अवसर पैदा किया है कि हिंदी लेखक वाद-वाद खेलने में जुट गए हैं. हालाँकि इस घटना का प्रतिरोध हिंदी लेखकों में जिस कदर दिखाई दे रहा है उससे यह आश्वस्ति होती है कि हिंदी की प्रतिरोध क्षमता अभी कम नहीं हुई …

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