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तसनीम खान की कहानी ‘मेरे हिस्से की चांदनी’

समकालीन युवा लेखन में तसनीम खान का नाम जाना-पहचाना है. उनकी नई कहानी पढ़िए- मॉडरेटर ============ आंगन में फैली रातरानी के महकने का वक्त हो चला। वो इस कदर महक रही थी कि पूरा घर इस खूशबू से तर हो गया। हवा के झोंकों के साथ इसकी खुशबू कमरों की …

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युवा शायर विजय शर्मा की कहानी ‘लिविंग थिंग’

आज पेश है युवा शायर विजय शर्मा की कहानी लिविंग थिंग – त्रिपुरारि ==================================================== छुट्टियों वाले दिन नींद अक्सर जल्द खुल जाया करती है..यदि छुट्टी सोमवार की हो, तो शायद और भी जल्द.. सुबह के नौ बज चुके थे और अयान अबतक अपनी बिस्तर में क़ैद था.. हालाँकि पिछले दो …

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कोठा नंबर 64

राकेश शंकर भारती ने जेएनयू से जापानी भाषा में उच्च शिक्षा प्राप्त की. इन दिनों यूक्रेन में हैं. कुछ दिनों पहले आपने उनकी एक कहानी पढ़ी थी जो बहुत पसंद की गयी. आज उनकी एक और मार्मिक कहानी प्रस्तुत है जिसमें देह का जादू टूटने पर एक वेश्या का अकेलापन …

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कहानी कहने वाला इक कहानी की कहानी है

कहानी सुनने वाले जो भी हैं वो ख़ुद कहानी हैं कहानी कहने वाला इक कहानी की कहानी है – जौन एलिया  कहानी कहना-सुनना किसे पसंद नहीं होता. कहानियाँ लिखने के बहुत पहले से हम कहानियाँ कहते आये हैं. कहानी शब्द का अर्थ है कहना. कहानी का लिखित रूप अधूरा है …

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साढ़े तीन कविता, सीपियों वाला पेंसिल बॉक्स और पीले पेपर के डिज़ाइन

हिंदी में किशोरों के जीवन, उनकी शिक्षा, उससे जुड़े तनावों को लेकर कम कहानी लिखी गई है. प्रबुद्ध जैन की यह कहानी उसी तरह की है- मॉडरेटर  =============================== बात साल 2007 की है। अंशुल फ़िफ़्थ में रहा होगा। मां–बाप यानी किशोर और नम्रता बेटे का हाथ थामे ‘तारे ज़मीं पर‘ …

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अणुशक्ति सिंह की कहानी ‘आखिरी बार’

हिंदी कहानियां बदल रही हैं. समकालीन जीवन की भागमभाग, उसकी जद्दोजहद सब कुछ बदल रही है. रिश्तों में भी वह ठहराव नहीं रह गया है. एक ऐसी कहानी है अणुशक्ति सिंह की, जिसमें किसी चीज का किसी तरह का लोड नहीं है. बदलते समाज की एक छोटी-सी कहानी-मॉडरेटर  ========================================================= “ये …

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मेरी नई कहानी ‘यार को मैंने जाबजा देखा…’

आज अपनी ही नई कहानी प्रस्तुत कर रहा हूँ जो एक कथा श्रृंखला का हिस्सा है- प्रभात रंजन  ===============================================================   यार को मैंने जाबजा देखा प्रभात रंजनउसकी बायीं आँख के ठीक नीचे कटे का निशान था. बड़ा-सा. चेहरे में सबसे पहले वही दिखाई देता था. ‘तीन टाँके लगे थे’, उसने बताया था. देखने में दो …

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प्रियंका दुबे की कहानी ‘डेडलाइन’

यह सब हम सब लिखने वालों के साथ होता होगा, डेडलाइन का दबाव, लिखने न लिखने का उहापोह. प्रियंका दुबे ने बहुत बारीकी से इस कहानी में इन्हीं भावों को बुना है. एक छोटी लेकिन एकदम अलग जमीन की कहानी- मॉडरेटर  ============================ मार्च के आख़िरी दिन थे और उस दोपहर …

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प्रियंका दुबे की कहानी ‘माय लेफ्ट फुट’

प्रियंका दुबे की पत्रकारिता से हम सब परिचित हैं. यहाँ आज आपके लिए उनकी एक छोटी सी कहानी, जिसके बारे में लेखिका का कहना है कि यह ‘शार्ट स्टोरी और स्टोरी के बीच का है कुछ शायद’. बहरहाल, यह एक मार्मिक कहानी है. एक फिल्म से अतीत के पन्ने जुड़ते …

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ओमा शर्मा की पुरस्कृत कहानी ‘दुश्मन मेमना’

ओमा शर्मा हमारे दौर के प्रमुख कथाकार हैं. उनको ‘रमाकांत स्मृति कथा-सम्मान’ दिए जाने की घोषणा हुई है. प्रस्तुत है उनकी पुरस्कृत कहानी : जानकी पुल ====================================================================== वह पूरेइत्मीनानसेसोयीपड़ीहै।बगलमेंदबोचेसॉफ्टतकिएपरसिरबेढंगापड़ाहै।आसमानकीतरफकिएअधखुलेमुंहसेआगेवालेदांतोंकीकतारझलकरहीहैं।होंठ कुछ पपडा़ से गए हैं,सांस का कोई पता ठिकाना नहीं है। शरीर किसी  खरगोशकेबच्चेकीतरहमासूमियतसेनिर्जीवपड़ाहै।मुड़ी–तुडी़  चादरकादोतिहाईहिस्साबिस्तरसेनीचेलटकापड़ाहै।सुबहकेसाढ़ेग्यारहबजरहेहैं।हरछुट्टीकेदिनकीतरहवहयूंसोयीपड़ीहैजैसेउठनाहीनहो।एक–दो बार मैंने दुलार से उसे ठेला …

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