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Tag Archives: गौतम राजऋषि

गौतम राजऋषि की कहानी ‘तीन ख्वाब, दो फोन-कॉल्स और एक रुकी हुई घड़ी’

गौतम राजऋषि सदाबहार लेखक हैं, शायर हैं. आज उनकी एक दिलचस्प कहानी पढ़िए- मॉडरेटर ==========  सर्दी की ठिठुरती हुई ये रात बेचैन थी| गुमशुदा धूप के लिए व्याकुल धुंध में लिपटे दिन की अकुलाहट को सहेजते-सहेजते रात की ठिठुरन अपने चरम पर थी| …और रात की इसी बेचैनी में एक …

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जब ग़ज़ल नहीं बुन पाता हूँ कहानी बुनने लगता हूँ- गौतम राजऋषि

गौतम राजऋषि भारतीय सेना में कर्नल हैं लेकिन हम हिंदी वालों के लिए वे शायर हैं, ‘हरी मुस्कुराहटों का कोलाज’ के कथाकार हैं, साहित्यिक बहसों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाले लेखक हैं. उनसे एक बेलाग और बेबाक बातचीत की है युवा लेखक पीयूष द्विवेदी ने- मॉडरेटर =================================================== सवाल – ये …

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चिनार पत्तों पर जख़्मों की नक्काशी

गौतम राजऋषि के कहानी संग्रह ‘हरी मुस्कुराहटों वाला कोलाज’ पर कल यतीन्द्र मिश्र जी ने इतना आत्मीय लिखा कि उसको साझा करने से रोक नहीं पाया. ऐसा आत्मीय गद्य आजकल पढने को कम मिलता है- मॉडरेटर ======================================== कर्नल गौतम राजऋषि की किताब ‘हरी मुस्कुराहटों वाला कोलाज’ एक अदभुत पाठकीय अनुभव …

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गौतम राजऋषि की कहानी ‘ सिमटी वादी : बिखरी कहानी’

  समकालीन लेखकों में गौतम राजऋषि एक ऐसे लेखक हैं जो सामान दक्षता के साथ अनेक विधाओं में लिखते हैं- ग़ज़ल, कहानियां, डायरी. ‘पाल ले इक रोग नादाँ’ के इस शायर का कहानी संग्रह आया है राजपाल एंड संज प्रकाशन से- हरी मुस्कुराहटों वाला कोलाज. उसी संग्रह से एक कहानी- …

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गौतम राजऋषि की नई नई ग़ज़लें

इस साल ग़ज़ल की जिस किताब की खूब चर्चा रही वह हिन्द युग्म से आई ‘पाल ले इक रोग नादां’ है. उसी शायर गौतम राजऋषि की नई नई गजलों को पढने की उपयुक्त शाम है. दिन में बारिश हुई है. शाम के बादल छाये हुए हैं- मॉडरेटर ======================================================= 1.   …

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कश्मीर और सेना की पृष्ठभूमि में एक कहानी ‘इक तो सजन मेरे पास नहीं रे…’

गौतम राजऋषि सेना में कर्नल हैं. ‘पाल ले इक रोग नादां’ जैसे चर्चित ग़ज़ल संग्रह के शायर हैं. यह कहानी कश्मीर की पृष्ठभूमि में सेना के मानवीय चेहरे को दिखाती है. बहुत मार्मिक कहानी- मॉडरेटर ======================================= वो आज फिर से वहीं खड़ी थी। झेलम की बाँध के साथ-साथ चलती ये …

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कर्नल शायर गौतम राजऋषि की चुनिन्दा ग़ज़लें

पता नहीं सहरसा की मिटटी में क्या है. पिछले कुछ समय से सहरसा के एक से एक लेखक सामने आए हैं. लेकिन गौतम राजऋषि जैसे विरुद्धों का सामंजस्य हैं. पेशे से कर्नल और दिल से शायर. हाल में ही हिन्द युग्म प्रकाशन से उनके गजलों का दीवान साया हुआ है …

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