Home / Tag Archives: प्रवीण कुमार झा (page 2)

Tag Archives: प्रवीण कुमार झा

रेणु जी के ‘मैला आँचल’ के अंश-पाठ का ऑडियो-वीडियो

आज फणीश्वरनाथ रेणु का जन्मदिन है. उनके उपन्यास ‘मैला आँचल’ के बारे में अनेक विद्वानों का यह मानना है कि यह हिंदी के सबसे अच्छे उपन्यासों में एक है. आज उसके एक अंश का बहुत सुन्दर पाठ प्रवीण झा ने किया है और उतना ही अच्छा वीडियो  भी बनाया है. …

Read More »

वैलेंटाइन पर परदेशी बाबू की देसी चिट्ठी

प्रवीण कुमार झा रहते नॉर्वे में हैं लेकिन ठेठ देशी किस्सा-कहानी लिखते हैं. वामा गांधी के नाम से ‘चमनलाल की डायरी’ नामक एक व्यंग्य-किताब लिख चुके हैं. आज वैलेंटाइन चिट्ठी लिखे हैं. परदेस से लिखे है आने में देरी हो गई है. मौका मिले तो पढियेगा- मॉडरेटर ============ लुबना चमार …

Read More »

कक्का जेपी बनकर क्रांति करेंगे!

नॉर्वे प्रवासी मिथिलावासी डॉक्टर व्यंग्यकार प्रवीण कुमार झा के ‘कक्का’ इस बार क्रांति के मूड में लौट आए हैं. पढ़िए- मॉडरेटर  =================== सुबह उठा तो बर्फ की चद्दर बिछी पड़ी थी। पूरी रात बस बर्फ गिरती रही शायद। पहाड़ों में जैसे जान आ गई। यह मनोरम दृश्य निहार रहा था …

Read More »

नॉर्वे में हूँ, निर्मल वर्मा की ‘परिंदे’ याद आ रही है!

नॉर्वे प्रवासी डॉक्टर-लेखक प्रवीण कुमार झा के व्यंग्य हम पढ़ते रहे हैं लेकिन यह व्यंग्य नहीं है. 25 अक्टूबर को निर्मल वर्मा की पुण्यतिथि है, उसी अवसर पर उन्होंने एक निर्मल-कथा लिखी है. पढ़ा जाए- मॉडरेटर  ===========   हिंदी कथाकारों में जो पहाड़ों में जीए, यूरोप वगैरा घूमे, उनमें और जो …

Read More »

बॉब डिलन को नोबेल और कवि कक्का का फोन!

गायक, गीतकार बॉब डिलन को साहित्य का नोबेल क्या मिला हर तरफ चर्चाओं का बाजार गर्म है. प्रवीण कुमार झा का एक अवश्य पठनीय टाइप व्यंग्य पढ़िए- मॉडरेटर  =============================================== कवि कक्का का अचानक फोन आया और डिसकनेक्ट हो गया। कवि कक्का, वही जिनका साहित्य अकादमी दो नम्मर से रह गया …

Read More »

पाकिस्तान का नमक खाया है

नॉर्वे-प्रवासी डॉक्टर व्यंग्यकार प्रवीण कुमार झा आज नए व्यंग्य के साथ- मॉडरेटर  ======================================================= मैं पाकिस्तान का नमक खाता हूँ। भड़किये नहीं! मैं ही नहीं, कई प्रवासी भारतीय पाकिस्तान का नमक-मसाला खाते हैं। दरअसल, यहाँ जितने भारतीय नमक-मसाले की दुकानें हैं, पाकिस्तानियों की है। अधिकतर रेस्तराँ, जिनमें हर तीसरे का नाम …

Read More »

प्रवीण कुमार झा का व्यंग्य ‘मिक्स्ड डबल’

पिछले दिनों युवा लेखक प्रवीण कुमार झा की किताब आई ‘चमनलाल की डायरी’. इस पर लेखक का नाम वामा गांधी है. वे इसी नाम से शायद ब्लॉग लिखा करते थे. बहरहाल, यह किताब अपने आप में सेल्फ पब्लिशिंग का अच्छा उदाहरण है. बिना किसी प्रचार-प्रसार के महज पाठकों और दोस्तों …

Read More »

फेसबुक-डिबेट और फेसबुकिया सपने

आजकल हिंदी वाले फेसबुक पर खूब डिबेट में लगे हुए हैं. अपने डॉक्टर व्यंग्यकार प्रवीण कुमार झा का यह व्यंग्य-लेख इसी पर है- मॉडरेटर  ========================== प्रयाग में आज शास्त्रार्थ ‘रिविजिटेड‘ का आयोजन है। रियैलिटी शो टाइप। मंच सजा है। ‘राईट‘ की ओर ‘मार्कण्डेय‘ लिखा है, ‘लेफ्ट‘ की ओर लिखा है …

Read More »

ओलम्पिक के नाम डॉक्टर की चिट्ठी

आज व्यंग्यकार प्रवीण कुमार झा की चिट्ठी ओलम्पिक के नाम- मॉडरेटर  ================================================ हम किस मिट्टी के बने हैं? किस चक्की का आटा खाते हैं? या सवाल यूँ तो वाहियात है, पर हमारी बनावट से जुड़ा है। उत्तर-पूर्व के लोग अक्सर फिट-फाट होते हैं, ‘V’ आकार के शरीर वाले। बंगाल-उड़ीसा तक आते-आते …

Read More »

दो नम्मर से साहित्य अकादमी रह गया था!

नॉर्वे प्रवासी डॉक्टर प्रवीण कुमार झा के व्यंग्य कुछ दिन न पढ़ें तो कुछ कुछ होने लगता है. यह ताज़ा है. पढियेगा- मॉडरेटर  =================== जब हिंदी लिखने की सोची तो कवि कक्का का ख्याल आया। इलाके के इकलौते ‘सर्टिफाइड‘ कवि। बाबा नागार्जुन के साथ उठना-बैठना था। कहते हैं दो नम्मर …

Read More »