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Tag Archives: राजकमल प्रकाशन

मंगलेश डबराल का जन्मदिन मंगलेश डबराल की कविताएँ

आज सुबह से याद था कि आज मेरे प्रिय कवियों में एक मंगलेश डबराल का जन्मदिन है लेकिन उनकी कविताओं के माध्यम से उनको याद करने का मौका अब मिला. यही सच है कि जो लोग हमारे काम के नहीं होते उनको हम देर से याद करते हैं. फिर भी …

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अफसानों में उभरा फसाद का दर्द

राजकमल प्रकाशन से जुबैर रिजवी के संपादन में एक किताब आई है ‘फसादात के अफ़साने’ यानी दंगों से जुड़ी कहानियां. नागेश्वर पांचाल ने इस किताबा पर लिखा है- मॉडरेटर =============================== फ़सादत के अफ़साने, जुबैर रज़वी द्वारा सम्पादित हिन्दुस्तान के फसादात के अफ़सानों का संग्रह है | फ़सादत के किस्सों पर …

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कृष्णा सोबती के उपन्यास ‘गुजरात पाकिस्तना से गुजरात हिन्दुस्तान’ से एक अंश

हिंदी की वरिष्ठ लेखिका कृष्णा सोबती का आत्मकथात्मक उपन्यास आया है ‘गुजरात पाकिस्तान से गुजरात हिन्दुस्तान’. पुस्तक का प्रकाशन राजकमल प्रकाशन से हुआ है. उसका एक अंश- मॉडरेटर =========================================== नए कमरे में उसने कई करवटें बदलीं। नई जगह का उनींदा। सिरोही राज के गैस्टहाउस में न घर अपना और न …

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‘सपने में पिया पानी’ की कुछ कविताएँ: समर्थ वशिष्ठ की कविताएँ

राजकमल प्रकाशन से इस साल कई युवा कवियों के संकलन आए हैं. इनमें एक अलग तरह का कवि समर्थ वशिष्ठ है. उनकी कविताओं का संग्रह है ‘सपने में पिया पानी’. वे अंग्रेजी में भी कविताएँ लिखते हैं. हिंदी में यह उनका पहला कविता संकलन है. उसी संग्रह से बिना कुछ …

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शाज़ी ज़माँ का ‘अकबर’

अकबर भारतीय इतिहास के सबसे बड़े नायकों में एक हैं. उनके ऊपर पहला उपन्यास आ रहा है- ‘अकबर‘. लिखा है शाज़ी ज़माँ ने. प्रकाशक है राजकमल प्रकाशन. आज जानकी पुल के पाठकों के लिए उसका एक अंश- मॉडरेटर यह उपन्यास  लेखक ने कल्पना के बूते पर नहीं, बाज़ार से दरबार तक …

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जिसे किम्वदंती समझते रहे आखिरकार वह इतिहास का हिस्सा हो गया!

राजकमल चौधरी ने लेखन में बनी-बनाई हर लीक को तोड़ने की कोशिश की, हर मानक को ध्वस्त किया. कल जब राजकमल चौधरी रचनावली का लोकार्पण हो रहा था और मंच से मैनेजर पाण्डेय उनकी महानता को लेकर वक्तव्य दे रहे थे, जिसके बारे में मैंने गीताश्री जी की फेसबुक वाल …

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अखिलेश के पुरस्कृत उपन्यास ‘निर्वासन’ का अंश

नब्बे के दशक के आखिरी वर्षों में लेखन शुरू करने वाले लेखकों के लिए अखिलेश बतौर लेखक-संपादक एक प्रतिमान की तरह रहे हैं। खुद मेरी आरंभिक रचनाओं पर अखिलेश का प्रभाव रहा है। उनकी पत्रिका ‘तद्भव’ में मेरी कई कहानियाँ उस दौर में प्रकाशित हुई। हालांकि अब अखिलेश से संवाद …

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