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Tag Archives: वंदना राग

वैधानिक गल्प:बिग थिंग्स कम इन स्माल पैकेजेज

चंदन पाण्डेय का उपन्यास ‘वैधानिक गल्प’ जब से प्रकाशित हुआ है इसको समकालीन और वरिष्ठ पीढ़ी के लेखकों ने काफ़ी सराहा है, इसके ऊपर लिखा है। शिल्प और कथ्य दोनों की तारीफ़ हुई है। यह टिप्पणी लिखी है जानी-मानी लेखिका वंदना राग ने- जानकी पुल। ============================ ब्रेकफास्ट ऐट टिफ़नीज़  (Breakfast …

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ज़ेहन रोशन हो तो बाहर के अँधेरे उतना नहीं डराते

गीताश्री के उपन्यास ‘वाया मीडिया’ एक अछूते विषय पर लिखा गया है। इसको पढ़ने वाले इससे प्रभावित हुए बिना नहीं रहते। यह उनके किताब की एक खास समीक्षा है क्योंकि इसे लिखा है वंदना राग ने। वंदना जी मेरी प्रिय लेखिकाओं में हैं और इस साल उनका एक बहुत प्यारा …

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नक्शे, सरहदें, शांति,  लघु जीवन और कला की एकरूपता से सजी है ‘बिसात पर जुगनू’

वंदना राग के उपन्यास ‘बिसात पर जुगनू’ पर यह टिप्पणी राजीव कुमार की ने लिखी है। उपन्यास राजकमल से प्रकाशित है- =============== “हम सब इत्तिहाद से बने हैं। हम सबमें एक दूसरे का कोई ना कोई हिस्सा है। इंसान इस सच से रू – ब – रू हो जाए तो …

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वंदना राग के उपन्यास ‘बिसात पर जुगनू’ का एक अंश

वंदना राग के उपन्यास ‘बिसात पर जुगनू’ को मैंने पूरा पढ़ लिया है तो आपको कम से कम एक अंश पढ़वाने का फ़र्ज़ तो बनता ही है। अगर राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित इस उपन्यास का अंश पसंद आए तो कल इस उपन्यास पर आयोजित कार्यक्रम में भी ज़रूर पधारिएगा- प्रभात …

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वंदना राग की कहानी ‘अम्मा की डायरी’

आज मदर्स डे है. समकालीन दौर की सबसे संवेदनशील कथाकार वंदना राग की यह कहानी पढ़िए. पढ़ते पढ़ते मुझे अपनी माँ से मिलने का मन हो गया.  मन पर गहरी छाप छोड़ने वाली कहानी- मॉडरेटर ==============================================                     मेरी अम्मा को लिखना नहीं …

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वंदना राग की ‘रीगल स्टोरी’

रीगल सिनेमा बंद हो गया. हम सबके अंतस में न जाने कितनी यादों के निशाँ मिट गए. इसी सिनेमा हॉल के बाहर हम तीन दिन लाइन में लगे थे ‘माया मेमसाहब’ की टिकट के लिए. तब भी नहीं मिली थी. फिल्म फेस्टिवल चल रहा था. हम डीयू में पढने वालों …

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‘मुक्तांगन’ में ‘राम’ से शाम तक

वसंत के मौसम के लिहाज से वह एक ठंढा दिन था लेकिन ‘मुक्तांगन’ में बहसों, चर्चाओं, कहानियों, शायरी और सबसे बढ़कर वहां मौजूद लोगों की आत्मीयता ने 29 जनवरी के उस दिन को यादगार बना दिया. सुबह शुरू हुई राम के नाम से और शाम होते होते दो ऐसे शायरों …

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वंदना राग की कहानी ‘स्टेला नौरिस और अपूर्व चौधुरी अभिनीत क्रिसमस कैरोल’

समकालीन स्त्री कथाकारों में वंदना राग सबसे अंडररेटेड लेखिका हैं. जबकि उनकी उनकी कहानियों की भाषा, कथ्य, इंटेंसिटी, शैली सब न सिर्फ अपने समकालीन कथाकारों से भिन्न है बल्कि उन्होंने हिंदी में स्त्री-लेखन को सर्वथा नई जमीन दी है. उनमें वह ‘तथाकथित’ बोल्डनेस नहीं है दुर्भाग्य से जिसे हिंदी में …

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