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Tag Archives: वाणी प्रकाशन

‘एक सेक्स मरीज़ का रोगनामचा: सेक्स ज़्यादा अश्लील है या कला जगत’ की समीक्षा

प्रसिद्ध कला एवं फिल्म समीक्षक विनोद भारद्वाज ने कला जगत को लेकर दो उपन्यास पहले लिखे थे. हाल में ही उनका तीसरा उपन्यास आया है ‘एक सेक्स मरीज़ का रोगनामचा: सेक्स ज़्यादा अश्लील है या कला जगत’, इस उपन्यास की समीक्षा इण्डिया टुडे के नए अंक में प्रकाशित हुई है …

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देश प्रेम और राष्ट्रवाद में मूलभूत अन्तर है: उदयन वाजपेयी

वाणी प्रकाशन की पत्रिका ‘वाक्’ का संपादन सुधीश पचौरी करते हैं. पत्रिका के नए अंक में राष्ट्रवाद और देशभक्ति पर बहस का आयोजन किया आया है. इसमें सबसे सुचिंतित लेख मुझे कवि-लेखक-सम्पादक उदयन वाजपेयी का लगा. राष्ट्रवाद और देशभक्ति को बहुत अच्छी तरह हमारे सामने रखता है. आप भी पढ़िए- …

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गगन गिल के नए कविता संग्रह से पांच कविताएँ

गगन गिल ने एक दौर में हिंदी कविता को नया मुहावरा दिया. दुःख की नई आवाज पैदा की. ऐसी आवाज जिसमें निजी-सार्वजनिक सब एकमेक हो जाते हैं. यह ख़ुशी का विषय है कि तकरीबन 14 साल बाद उनका नया कविता संग्रह प्रकाशित हुआ है ‘मैं जब तक आई बाहर’. यह …

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‘छोटी-छोटी गौवें, छोटे-छोटे ग्वाल, छोटे से हमरे मदन गोपाल’

राकेश तिवारी का उपन्यास आया है ‘फसक‘. कुमाऊँनी में फसक का मतलब गप्प होता है. हजारी प्रसाद द्विवेदी गल्प यानी उपन्यास को गप्प मानते थे. उपन्यास का एक रोचक अंश. प्रसंग गौ-कथा सुनने का है. यह उपन्यास वाणी प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है- मॉडरेटर ================================= नन्नू महराज के आश्रम में …

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धर्मपाल की किताब ‘गौ-वध और अंग्रेज’ का एक अंश

गाय को लेकर इस गर्म माहौल में मुझे प्रसिद्ध गांधीवादी चिन्तक धर्मपाल की किताब ‘गौ वध और अंग्रेज’ की याद आई. जिसका प्रकाशन वाणी प्रकाशन द्वारा किया गया था. इस पुस्तक में धर्मपाल जी ने अंग्रेज सरकार के प्रामाणिक दस्तावेजों के आधार पर यह दिखाया था कि किस तरह भारत …

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प्रशांत किशोर “लीजेंड” बनते बनते रह गए या बन ही गए?

कल से कांग्रेस की शर्मनाक हार और रणनीतिकार प्रशांत किशोर को लेकर स्टेटस लिखे जा रहे हैं, चुटकुले बनाए जा रहे हैं. कल वे ट्विटर पर ट्रेंड कर रहे थे. प्रतिष्ठा सिंह ने अपनी किताब ‘वोटर माता की जय’ में पीके के बारे में भी लिखा था. पीके ने जब …

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‘पतनशील पत्नियों के नोट्स’ और होली का त्यौहार

पिछले दिनों वाणी प्रकाशन से एक किताब आई ‘पतनशील पत्नियों के नोट्स’. नीलिमा चौहान की इस किताब ने जैसे हिंदी साहित्य की तथाकथित मर्यादा की परम्परा से होली ही खेल दी, स्त्रीवादी लेखन को उसकी सर्वोच्च ऊंचाई पर ले जाने वाली इस किताब में दो प्रसंग होली से भी जुड़े …

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आज से आई.पी. कॉलेज में शुरू हो रहा है ‘हिंदी महोत्सव’

आज से ‘हिंदी महोत्सव’ की शुरुआत हो रही है. दिल्ली विश्वविद्यालय के आई.पी. कॉलेज और वाणी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में दो दिनों का यह महोत्सव हिंदी को लेकर दिल्ली में अपनी तरह का पहला ही आयोजन है. भारतीय भाषाओं को लेकर दिल्ली में फेस्टिवल होते रहे हैं लेकिन यह …

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मोदी के तिलिस्म के आगे और पीछे

 ब्रांड मोदी का तिलिस्म: बदलाव की बानगी– धर्मेन्द्र कुमार सिंह की यह कितान बहुत सही टाइम पर आई है. मोदी सरकार के दो साल पूरे होने का जश्न मनाया जाने वाला है. दूसरी तरफ अभी पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे आये हैं. भाजपा ने असम में पहली …

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जयश्री रॉय के उपन्यास ‘दर्दजा’ का अंश

कल से शुरू हो रहे विश्व पुस्तक मेले में जानी-मानी लेखिका जयश्री रॉय का उपन्यास ‘दर्दजा’ जारी हो रहा है. वाणी प्रकाशन से प्रकाशित हो रहे इस उपन्यास का एक अंश- मॉडरेटर  ============================================= वह एक सांवला सा दिन था. बारिश के आखिरी दिन जब बादल खुद को समेटने लगे थे …

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