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Tag Archives: हार्पर कॉलिन्स

मुल्क तो बंटा, लोग भी बंट गये। वो एक लोग थे। अब दो लोग हो गये। 

गुलजार साहब ने उर्दू में एक उपन्यास लिखा. पहले वह अंग्रेजी में प्रकाशित हुआ ‘टू’ नाम से. कुछ महीने बाद हिंदी में ‘दो लोग’ नाम से प्रकाशित हुआ. उर्दू में अभी तक प्रकाशित हुआ है या नहीं, पता नहीं. इसे पढ़ते हुए एक किस्सा याद आ गया. एक बड़े लेखक(जो …

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माइक्रोसोफ्ट के सीईओ की किताब ‘हिट रिफ्रेश’ का एक अंश

पिछले साल एक ऐसी किताब का अनुवाद किया जिससे बहुत कुछ सीखा. वह किताब है माइक्रोसोफ्ट कंपनी के भारतीय सीईओ सत्य नडेला की ‘हिट रिफ्रेश’. हार्पर कॉलिंस से प्रकाशित यह किताब यह बताती है कि किस प्रकार आर्टिफिशियल इन्तेलिजेन्स, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स आदि तकनीकों के माध्यम से आने वाले चार-पांच …

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ऋषि कपूर की आत्मकथा कपूर परिवार की ‘खुल्लमखुल्ला’ है

कल किन्डल पर ऋषि कपूर की आत्मकथा ‘खुल्लमखुल्ला’ 39 रुपये में मिल गई. पढना शुरू किया तो पढता ही चला गया. हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े सबसे सफल घराने कपूर परिवार के पहले कपूर की आत्मकथा के किस्सों से पीछा छुड़ाना मुश्किल था. सबसे पहले अफ़सोस इस बात का हुआ …

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क्या पत्रकार होना कमतर लेखक होना होता है?

जब दो सप्ताह पहले ‘जनसत्ता’ में प्रकाशित अपने लेख में  प्रोफ़ेसर गोपेश्वर सिंह ने लप्रेक लेखक रवीश कुमार को टीवी पत्रकार कहकर याद किया था तो सबसे पहले मेरे ध्यान में यह सवाल आया था कि क्या लेखक होने के लिए किसी ख़ास पेशे का होना चाहिए? हम शायद यह भूल जाते …

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जगजीत सिंह की जीवनी ‘बात निकलेगी तो फिर’ का एक चुनिन्दा अंश

हाल में ही ग़ज़ल सम्राट जगजीत सिंह की जीवनी आई है. सत्या सरन की लिखी यह जीवनी ‘बात निकलेगी तो फिर’ हार्पर कॉलिन्स से आई है और इसका हिंदी अनुवाद मैंने किया है. एक चुनिन्दा अंश उसी पुस्तक से जिसका सम्बन्ध जगजीत सिंह के आरंभिक दिनों से है- प्रभात रंजन  …

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दलाल की बीवी की आंखें

कुछ लेखक परम्परा निर्वाह करते हुए लिखते हैं, कुछ अपनी परम्परा बनाने के लिए. रवि बुले ऐसे ही लेखक हैं. उनका पहला उपन्यास ‘दलाल की बीवी’ शीर्षक से चौंकाऊ लग सकता है, मगर यह संकेत देता है कि भविष्य के उपन्यास किस तरह के हो सकते हैं. पढ़ते हुए मुझे …

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