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अज्ञेय के उपन्यास ‘अपने अपने अजनबी’ का एक अंश

आज बैठे बैठे अज्ञेय के उपन्यास ‘अपने अपने अजनबी’ की याद आई। उपन्यास के केंद्र में मृत्यु का भय है। किस तरह मृत्यु को सामने पाकर कैसे प्रियजन भी अजनबी हो जाते हैं और अजनबी पहचाने हुए। मृत्यु से ज़्यादा डर मृत्यु के भय का होता है।सेल्मा कैंसर से पीड़ित …

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अज्ञेय की पुण्यतिथि पर उनका लेख ‘मैं क्यों लिखता हूँ?’

आज मूर्धन्य लेखक अज्ञेय जी की पुण्यतिथि है. आज ही के दिन 1987 ईस्वी में उनका निधन हुआ था. यह उनकी मृत्यु का 30 वां साल है. आज उनको याद करते हुए पढ़िए उनका यह लेख ‘मैं क्यों लिखता हूँ?- मॉडरेटर ================================================= मैं क्यों लिखता हूँ? मैं क्यों लिखता हूँ? …

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अज्ञेय का दुर्लभ और अप्राप्य निबंध ‘पानी का स्वर’

रज़ा फाउंडेशन, दिल्ली की एक लघु परियोजना के अन्तर्गत कवि-सम्पादक मित्र पीयूष दईया हिन्दी और अंग्रेजी भाषा की अप्राप्त रचना-सामग्री एकत्र कर रहे हैं—-विभिन्न विद्यानुशासनों और विधाओं की रचनाएँ। इसी सिलसिले में उन्हें अज्ञेय जी के कुछ आलेख मिले हैं। उन्हीं में से एक अप्राप्त निबन्ध जो (आजकल’ में प्रकाशित …

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अज्ञेय की पहली जीवनी अंग्रेजी में लिखी जा रही है

कल एक कार्यक्रम में बोलते हुए अंग्रेजी के विद्वान् लेखक रामचंद्र गुहा ने यह बताया कि अज्ञेय की जीवनी लिखी जा रही है. प्रसिद्ध युवा पत्रकार अक्षय मुकुल हिंदी के विराट लेखक अज्ञेय की जीवनी अंग्रेजी में लिख रहे हैं. अक्षय ने ‘गीता प्रेस एंड मेकिंग ऑफ़ हिन्दू इण्डिया’ पुस्तक …

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फेसबुक पर विद्वानों के अपने-अपने अज्ञेय

·         बात शुरु हुई थी अनिल यादव के इंटरव्यू में आए  अज्ञेय के इस सन्दर्भ से– मुझे लगता है कि हिंदी के पास अज्ञेय के रूप में एक अपना रवींद्रनाथ टैगोर था. हमने उसे नहीं पहचाना और खो दिया- देखते-देखते यह फेसबुक पर अज्ञेय को लेकर एक गंभीर …

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शमशेर बहादुर सिंह के अज्ञेय

  अज्ञेय विविधवर्णी लेखक और विराट व्यक्तित्व वाले थे. यही कारण है कि कुछ विद्वानों का यह मानना रहा है कि रवीन्द्रनाथ टैगोर के बाद वे सबसे बड़े भारतीय लेखक थे. अभी हाल में ही कोलकाता में बोलते हुए उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने भी यही कहा. पहले हिंदी-लेखक राजेंद्र यादव …

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अज्ञेय अपने दौर के सबसे बड़े कवि थे- नामवर सिंह

ओम थानवी (बाएं) द्वारा संपादित ‘अपने अपने अज्ञेय’ के परिवर्धित संस्करण (दो भाग) का लोकार्पण करते हुए डॉ नामवर सिंह. साथ में हैं कुंवर नारायण और अशोक वाजपेयी  हमारी भाषा के मूर्धन्य आलोचक नामवर सिंह ने कहा है कि अज्ञेय अपने दौर के सबसे बड़े कवि थे, कि ‘शेखर: एक …

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जान लिया तब प्रेम रहा क्या?

एक किताब आई है- जियो उस प्यार में जो मैंने तुम्हें दिया है. यह अज्ञेय की प्रेम-कविताओं का संचयन है. संपादन किया है ओम निश्चल ने. पुस्तक किताबघर प्रकाशन से आई है. इस वासंती शाम उसी संकलन की कुछ कविताएँ- जानकी पुल. —————————————————————- 1. जान लिया तब प्रेम रहा क्या? …

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स्मृतियों में ठहरे अज्ञेय

कोलकाता में ‘अपने अपने अज्ञेय’ का लोकार्पण  अज्ञेय की जन्मशताब्दी के साल उनकी रचनात्मकता के मूल्यांकन-पुनर्मूल्यांकन का दौर चलता रहा. कई किताबें आई, कई इस पुस्तक मेले में आ रही हैं. लेकिन वरिष्ठ संपादक, सजग भाषाविद ओम थानवी सम्पादित पुस्तक ‘अपने-अपने अज्ञेय’ अलग तरह की है. पुस्तक से पता चलता …

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लिख दूँगा दीवार पर तुम्हारा नाम

अज्ञेय के जन्म-शताब्दी वर्ष में प्रोफ़ेसर हरीश त्रिवेदी ने यह याद दिलाया है कि १९४६ में अज्ञेय की अंग्रेजी कविताओं का संकलन प्रकाशित हुआ था ‘प्रिजन डेज एंड अदर पोयम्स’. जिसकी भूमिका जवाहरलाल नेहरु ने लिखी थी. लेकिन बाद अज्ञेय-विमर्श में इस पुस्तक को भुला दिया गया. इनकी कविताओं का …

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