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Tag Archives: anant vijay

क्या मार्क्सवाद ने सचमुच हिंदी साहित्य का भारी नुक़सान कर दिया?

हिंदी पत्रकारिता में दक्षिणपंथ की सबसे बौद्धिक आवाज़ों में एक अनंत विजय की किताब ‘मार्क्सवाद का अर्धसत्य’ ऐसे दौर में प्रकाशित हुई है जब 2019 के लोकसभा चुनावों में वामपंथी दलों की बहुत बुरी हार हुई है, वामपंथ के दो सबसे पुराने गढ़ केरल और पश्चिम बंगाल लगभग ढह चुके …

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क्या हिंदी अदालतों के कामकाज की भाषा बनने जा रही है?

अनन्त विजय विचारोत्तेजक लेख लिखते हैं, हिंदी की भावना, संवेदनाओं को जगा देते हैं. यह लेख बहुत अच्छी तरह से इस बात को सामने रखता है कि अदालतों का कामकाज देशी भाषाओं में हो इसके लिए क्या प्रयास हुए हैं और हाल में किस कारण से ऐसा लग रहा है …

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वाम के समक्ष साख का संकट है या फिर नेतृत्व का?

लेखक-पत्रकार अनंत विजय का यह पत्र कल ‘जनसत्ता’ में छपा था. सीपीएम के महासचिव प्रकाश करात के नाम. वाम राजनीति के सिमटते जाने, उसके अंतर्विरोधों को लेकर लेखक ने कई गंभीर सवाल उठाये हैं. जिन्होंने न पढ़ा हो उनके लिए- जानकी पुल. ============================= आदरणीय प्रकाश करात जी,  लोकसभा की आधी …

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