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Tag Archives: arvind das

इरफान अभी यात्रा के बीच थे

महान अभिनेता इरफ़ान के असमय निधन ने सबको उदास कर दिया है। यह श्रद्धांजलि लिखी है जाने माने युवा पत्रकार-लेखक अरविंद दास ने- मॉडरेटर =============== इरफान अभी यात्रा के बीच थे. उन्हें एक लंबी दूरी तय करनी थी. हिंदी सिनेमा को उनसे काफी उम्मीदें थी. हिंदी जगत की बोली-बानी, हाव-भाव, …

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अरविंद दास का लेख ‘शाहीन बाग़ की औरतें’

दिल्ली का शाहीन बाग़ एक प्रतीक बन चुका है स्त्री संघर्ष का। इसी पर युवा पत्रकार-लेखक अरविंद दास का लेख पढ़िए- मॉडरेटर ============= मशहूर शायर निदा फाजली का एक शेर है-हर आदमी में होते हैं दस-बीस आदमी, जिसको भी देखना हो कई बार देखना. ठीक इसी तरह एक शहर में …

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चुन-चुन खाइयो मांस: आमिस  

असमिया भाषा की फ़िल्म ‘आमिस’ पर यह टिप्पणी युवा लेखक-पत्रकार अरविंद दास ने लिखी है- मॉडरेटर ============== एक बार मैं एक दोस्त के साथ खाना खा रहा था. अचानक से दाल की कटोरी से उसने झपटा मार के कुछ उठाया और मुँह में डाल लिया. जब तक मैं कुछ समझता, हँसते …

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अरविंद दास का लेख ‘बेगूसराय में ‘गली बॉय’

बिहार के बेगूसराय का चुनाव इस बार कई मायने में महत्वपूर्ण है।कन्हैया कुमार जहाँ भविष्य की राजनीति की उम्मीद हैं तो दूसरी तरफ़ उनका पारम्परिक राजनीति की दो धाराओं द्वारा विरोध किया जा रहा है। जीत हार बाद की बात है लेकिन यह चुनाव विचारधारों के संघर्ष का एक बड़ा …

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तथ्य और सत्य के बीच फेक न्यूज

युवा पत्रकार अरविन्द दास का यह लेख फेक न्यूज को लेकर चल रही बहस को कई एंगल से देखता है. उसके इतिहास में भी जाता है और वर्तमान पेचीदिगियों से भी उलझता है. अरविन्द दास पत्रकार हैं, पत्रकारिता पर शोध कर चुके हैं और हाल में ही उनके लेखों का …

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नागार्जुन से तरौनी कभी छूटा नहीं

आज बाबा नागार्जुन की पुण्यतिथि है. इस अवसर पर युवा पत्रकार-लेखक अरविन्द दास का यह लेख प्रस्तुत है, जिसमें उनके गाँव तरौनी की यात्रा का भी वर्णन है. यह लेख उनके शीघ्र प्रकाश्य पुस्तक ‘बेखुदी में खोया शहर: एक पत्रकार के नोट्स’ में संकलित है. बाबा को सादर प्रणाम के …

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वीरेन डंगवाल की सम्पूर्ण कवितायें पर अरविंद दास की टिप्पणी

अभी हाल में ही नवारुण प्रकाशन से जनकवि वीरेन डंगवाल की सम्पूर्ण कविताओं की किताब प्रकाशित हुई है। उसके ऊपर एक सारगर्भित टिप्पणी युवा लेखक-पत्रकार अरविंद दास की- मॉडरेटर ============================================= समकालीन हिंदी कविता की बनावट और बुनावट दोनों पर लोक की छाप स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है. लोक की …

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ऑनलाइन समाचार की दुनिया में नयापन क्यों नहीं है?

ऑनलाइन समाचारों की दुनिया पर ‘हिंदी में समाचार’ जैसी शोधपरक पुस्तक के लेखक अरविन्द दास का लेख- मॉडरेटर =============== श्रीदेवी की दुखद मौत बॉलीवुड और उनके फैन्स के लिए सदमे से कम नहीं था. उनकी मौत होटल के बाथटब में दुर्घटनावश डूबने के कारण हुई, लेकिन टेलीविजन न्यूज चैनल ने …

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‘ऑनलाइन’ प्रतिरोध को ‘ऑफलाइन’ प्रतिरोध से जोड़े जाने की जरुरत है

‘not in my name’ कैम्पेन फिल्मकार सबा दीवान के फेसबुक वाल से शुरू हुआ और देश भर में फैला. सरकार डिजिटल इण्डिया की बात करती है. देश के लोगों ने दिखा दिया कि डिजिटल इण्डिया का क्या मतलब होता है. लेकिन भाषा को लेकर कुछ सवाल उठे. क्या देशी भाषाओं …

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मृत्यु-गंध में लिपटी स्वदेश दीपक की ‘बगूगोशे’ की ख़ूशबू

जगरनॉट बुक्स से स्वदेश दीपक की आखिरी कहानियों का संग्रह प्रकाशित हुआ है- बगूगोशे. इस संग्रह पर युवा लेखक-पत्रकार अरविन्द दास की लिखत पढ़िए. कितनी आत्मीयता से लिखा है- मॉडरेटर ======================================= मृत्यु-गंध कैसी होती है/ वह एक ऐसी खुशबू है/ जो लंबे बालों वाली/ एक औरत के ताजा धुले बालों …

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