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Tag Archives: arvind das

मृत्यु-गंध में लिपटी स्वदेश दीपक की ‘बगूगोशे’ की ख़ूशबू

जगरनॉट बुक्स से स्वदेश दीपक की आखिरी कहानियों का संग्रह प्रकाशित हुआ है- बगूगोशे. इस संग्रह पर युवा लेखक-पत्रकार अरविन्द दास की लिखत पढ़िए. कितनी आत्मीयता से लिखा है- मॉडरेटर ======================================= मृत्यु-गंध कैसी होती है/ वह एक ऐसी खुशबू है/ जो लंबे बालों वाली/ एक औरत के ताजा धुले बालों …

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आपातकाल के 40 साल बाद: मीडिया और मोदी सरकार

एनडीटीवी के मालिक प्रणय रॉय के घर पड़े छापे के बाद से यह बहस तेज हो गई है कि उस छापे के माध्यम से सरकार मीडिया को क्या सन्देश देना चाहती थी? इस प्रकरण के बहाने एक सुचिंतित लेख लिखा है अरविन्द दास ने. अरविन्द पत्रकारिता से पीएचडी कर चुके …

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मैथिली सिनेमा को भी ‘अनारकली’ का इंतज़ार है

  अरविन्द दास ने मीडिया पर बहुत अच्छी शोधपूर्ण पुस्तक लिखी है. एक प्रतिष्ठित मीडिया हाउस में काम करते हैं. समकालीन विषयों पर बारीक नजर रखते हैं और सुचिंतित लिखते हैं. अब यही लेख देखिये मैथिली सिनेमा की दशा-दिशा पर कितना बढ़िया लिखा है- मॉडरेटर ===================== ‘अनारकली ऑफ आरा ‘फ़िल्म …

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हिंदी में एकांगी मीडिया मंथन

अरविंद दास ने जेएनयू से मीडिया पर पीएचडी कर रखी है। मेरे जानते हिन्दी में मीडिया पर जो गिनी चुनी शोधपूर्ण पुस्तकें हैं उनमें एक अरविंद दास की किताब भी है- हिंदी में समाचार। एक मीडिया संस्थान में काम भी करते हैं। बहरहाल, मीडिया और विज्ञापन को लेकर उनकी या …

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