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Tag Archives: ashok kumar pandey

हिन्दी कविता के दो दशक– चेहरे, मुखौटे और चश्मे

समकालीन कविता क्या अपने समय-समाज का रूपक है? क्या समकालीन कवि आधुनिक हिंदी कविता की छायाओं से मुक्त हो चुका है? क्या देश की बदलती राजनीति को समकालीन कविता के माध्यम से समझा जा सकता है? अशोक कुमार पांडे का यह लेख कुछ ऐसे ही विचारोत्तेजक सवालों को उठाता है- …

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अशोक कुमार पांडे की कहानी ‘जंगल’

अशोक कुमार पांडे संवेदनशील कवि ही नहीं हैं एक सजग कथाकार भी हैं. उनकी इस कहानी में हाशिए के लोगों का जीवन है, उसकी तकलीफ है- जानकी पुल  झिर्रियों से आ रही हवा किसी धारदार हथियार की तरह जख़्मी कर रही थी। गोमती ने साड़ी का पल्लू चेहरे पर लपेट …

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