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Tag Archives: ashok vajpeyi

हिंदी में लोकप्रियता का आतंक तेजी से बढ़ रहा है

आज अशोक वाजपेयी ने श्रेष्ठता और लोकप्रियता को लेकर ‘जनसत्ता’ में अपने स्तंभ ‘कभी-कभार’ में अच्छा लिखा है. बहसतलब- जानकी पुल. ===========================  लोकतंत्र और आधुनिक संसार दोनों में संख्या का बड़ा महत्त्व है। बाहुबल और धनबल आदि का इस्तेमाल लोकतंत्र में अंतत: संख्याबल पाने के लिए किया जाता है। जिसके …

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विस्‍मृति के गर्त में अकेले जा रहे हैं हम

कवि-आलोचक और ललित कला अकादमी के अध्‍यक्ष सुप्रसिद्धअशोक वाजपेयी आज सत्तर साल के हो गए. इस अवसर पर उनसे प्रसिद्ध पत्रकार-संस्कृतिकर्मी अजित राय ने उनसे कुछ खरी-खरी बातें कीं. प्रस्तुत है आपके लिए- जानकी पुल. 16 जनवरी 2011 को आप 70 साल के हो रहे हैं। लगभग 50 साल की …

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