Home / Tag Archives: ashutosh bhardwaj (page 2)

Tag Archives: ashutosh bhardwaj

एक अनुशासनहीन फेंटेसी है ‘अँधेरे में’

पिछले साल मुक्तिबोध की मृत्यु की अर्ध-शताब्दी थी. इस मौके पर उनके ऊपर खूब कार्यक्रम हुए, थोक के भाव में उनकी रचनाओं को लेकर लेख सामने आये. लेकिन दुर्भाग्य से, किसी लेख में कोई नई बात नहीं दिखी. लगभग सारे लेखों को पढने के बाद यह कह सकता हूँ कि …

Read More »

बस्तर में सवेरा मृत्यु की बांग से होता है

लेखक आशुतोष भारद्वाज जैसे बस्तर के जीवन की धडकन को अपने शब्दों में उतार देते हैं. भय, संशय, उहापोह के बीच सांस लेता बस्तर, जिसके जंगलों में नक्सलवादी रहते बताये जाते हैं- जानकी पुल. =================================================================   गरुड़ पर्व  मार्च के आखिरी दिनों में बस्तर के पेड़ जब पत्तियां झरा चुकते …

Read More »

डाह का साहित्यशास्त्र

युवा लेखक आशुतोष भारद्वाज हिंदी के साहित्यिक परिदृश्य पर- जानकी पुल. ===================================================  माहौल इस कदर खौफनाक हिंदी में क़िबला कि कहीं शिरकत करें तो पहले मेजबान से सभी संभावित-असंभावित प्रतिभागियों-श्रोताओं की सूची और उनकी विस्तृत जन्मकुंडली मंगा लें, जन्मोपरांत उनकी सभी गतिविधियों का बारीकान्वेषण समेत. नहीं तो आपके बगल में कोई …

Read More »

हिंदी के वरिष्ठ लेखक सार्वजनिक बयान देने से क्यों बचते-डरते है?

ज्ञानपीठ-गौरव प्रकरण में खूब बहस चली, आज भी चल रही है. आशुतोष भारद्वाज ने उस प्रकरण के बहाने हिंदी लेखक समाज की मानसिकता, उसके बिखराव को समझने का प्रयास किया है. आशुतोष स्वयं कथाकार हैं, अंग्रेजी के पत्रकार हैं, शब्दों की गरिमा को समझते हैं, लेखन को एक पवित्र नैतिक …

Read More »

कविता विद्रोही और बागी की अनिवार्य संगिनी रही है

युवा पत्रकार-कथाकार आशुतोष भारद्वाज छत्तीसगढ़ के जंगलों का सच लिख रहे हैं. हाल में ही अबूझमाड़ को लेकर इंडियन एक्सप्रेस में उनकी रपट काफी चर्चा में रही. यहां उनकी डायरी के कुछ अंश- जानकी पुल.  ———————————————– मार्च। कोई कथित नक्सली जब गिरफ्तार होता है, जिसके खिलाफ किसी हिंसा में संलग्नता …

Read More »

कोई नहीं लिखता यहां क्या हो रहा है

कथाकार-पत्रकार आशुतोष भारद्वाज छत्तीसगढ़ के नक्सली घोषित इलाकों में घूम-घूम कर बड़ी बारीक टिप्पणियां कर रहे हैं, बड़े वाजिब सवाल उठा रहे हैं. भूलने के विरुद्ध एक जरूरी कार्रवाई- जानकी पुल. ————— नये साल की पहली रात। बस्तर और कश्मीर की भौगोलिक काया और जैविक माया में रोचक साम्य — …

Read More »

सुकमा के जंगल में काली धातु चमकती है

प्रसिद्ध पत्रकार आशुतोष भारद्वाज ने 2012 में छत्तीसगढ़ के नक्सली इलाकों में रहते हुए वहां के अनुभवों को डायरी के रूप में लिखा था. सुकमा की नृशंस हत्याओं के बाद उनकी डायरी के इस अंश की याद आई जो नक्सली माने जाने वाले इलाकों की जटिलताओं को लेकर हैं. हालात …

Read More »

कहां हो दिल्ली के परमज्ञानी आचार्य?

जशपुर के ठूंठी अम्बा गाँव में एक पिता जिसकी बेटी हाल में ही लौटी  युवा कथाकार-पत्रकार आशुतोष भारद्वाज छत्तीसगढ़ के ग्रामीण-जंगली इलाकों को एक नई नज़र से देख रहे हैं, ऐसी नज़र से जिसमें लोगों को पहचानने के बने-बनाये सांचे नहीं हैं, बल्कि इंसान तक पहुँचने वाली इंसानी समझ है. …

Read More »

कोई और न सही, अबूझमाड़ तो साक्षी होगा ही

कथाकार आशुतोष भारद्वाज की नक्सल डायरीविकास और सभ्यता की परिभाषाओं से दूर गाँवो-कस्बों के उन इलाकों के भय-हिंसा से हमें रूबरू कराता है जिसे सरकारी भाषा में नक्सल प्रभावित इलाके कहा जाता है. इस बार अबूझमाड़ – जानकी पुल. पहाड़ और जंगल के बीच अटके किसी कस्बे का बीच सितंबर। — …

Read More »

खुमार और खून हमजाद़ हैं यहाँ

युवा कथाकार-पत्रकार आशुतोष भारद्वाज की ‘नक्सल डायरी’ की दूसरी किस्त.  सरगुजा, बीजापुर, बस्तर-दंतेवाड़ा के इलाके अब नक्सल-प्रभावित इलाके कहलाते हैं. इनके घने जंगलों के बीच जो जीवन धडकता है अनिश्चयता के भय और आतंक के साये में वह कितना बदल रहा है. यह आशुतोष की कलम का जादू है- वह …

Read More »