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Tag Archives: gabriel garcia marquez

मार्केज़ की कहानी ‘नीले कुत्ते की आँखें’

कल इंदिरा गाँधी नेशनल सेंटर फॉर द आर्ट्स में मार्केज़ के अनुवादों को लेकर खूब चर्चा हुई तो मुझे याद आया कि उनकी एक कहानी का सुन्दर अनुवाद सरिता शर्मा ने किया है- ‘नीले कुत्ते की आँखें.’ मार्केज़ की इस एक और कहानी का हिंदी में आनंद उठाइए- प्रभात रंजन  ====================================================     …

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मैं तुम्हें छू लेना चाहता था, मार्केस!

युवा लेखक श्रीकांत दुबे पिछले दिनों मेक्सिको में थे. मार्केस के शहर मेक्सिको सिटी में. तब मार्केस जिन्दा थे. उनका यह संस्मरणात्मक लेख लैटिन अमेरिका में मार्केस की छवि को लेकर है, मार्केस से मिलने की उनकी अपनी आकांक्षा को लेकर है. पढ़ते हुए समझ में आ जाता है कि …

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मार्केस की कहानी ‘मंगलवार की दोपहर’

आज मार्केस की एक कहानी. कहानी का अनुवाद कवि नरेन्‍द्र जैन ने किया है- जानकी पुल  ============================================================ ट्रेन रेतीली चट्टानों की थरथराती सुरंग से प्रकट हुई और उसने बेहद लंबे और समतल केले के बागानों को पार करना शुरू कर दिया। हवा नम हो चुकी थी और उन्‍हें अब समुद्री हवा …

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मार्केज़ के एक इंटरव्यू का हिंदी अनुवाद

गाब्रियल गार्सिया मार्केज़ के साथ पीटर एच. स्टोन की बातचीत का सम्पादित अंश   जिसका अनुवाद मैंने किया है- प्रभात रंजन. प्रश्न- टेपरिकार्डर के उपयोग के बारे में आप क्या सोचते हैं? मार्केज़- मुश्किल यह है कि जैसे ही आपको इस बात का पता चलता है कि इंटरव्यू को टेप …

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मार्केज़ जीवन-प्रसंग: पत्रकारिता से सीखे लेखन के गुर

मार्केज़ ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि वास्तव में पत्रकारिता और उपन्यास एक माँ की ही संतानें हैं। अपनी एक बातचीत में उन्होंने कहा था कि केवल एक तथ्य पत्रकारिता को संदिग्ध बना देता है जबकि कहानी-उपन्यास में अगर कोई एक तथ्य सही हो जाए तो वह पूरी कृति …

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मार्खेज़-जीवन प्रसंग: मसीजीवी होने का फैसला और पहला उपन्यास

नोबेल पुरस्कार विजेता लेखक मार्खेज़ के संघर्ष के दिनों के कुछ रोचक और प्रेरक प्रसंगों से हम समय-समय पर आपको रूबरू करवाते रहे हैं. आज आइये उनके पहले उपन्यास ‘लीफ स्टोर्म’ से जुड़े किस्से से रूबरू होते हैं- जानकी पुल. जब 21 साल की उम्र में मार्केज़ ने यह तय …

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मशहूर लेखक मार्केज़ के कुछ रोचक जीवन प्रसंग

गाब्रिएल गार्सिया मार्केज़ को विश्व के महानतम जीवित लेखक के रूप में देखा जाता है. उनके जीवन और लेखन को लेकर मैं हिंदी में मैं एक पुस्तक लिख रहा हूँ. यहाँ उसके कुछ रोचक अंश प्रस्तुत हैं जिनका संबंध मार्केज़ के जीवन से है- जानकी पुल. अंधविश्वास और फितूर मार्केज़ …

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सच को सपने की तरह लिखने वाला लेखक

 महान लेखक मार्खेज़ के जीवन और लेखन पर मेरा यह लेख ‘अहा ज़िंदगी’ नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ था- प्रभात रंजन  बीसवीं शताब्दी के सबसे प्रभावशाली लेखकों में माने जाने वाले लेखक गाब्रिएल गार्सिया मार्केज़ ने अपने बारे में लिखा है कि मेरा आरंभिक जीवन कठिन लेकिन जादुई था लेकिन …

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‘लव इन द टाईम ऑफ कॉलरा’ से एक संपादित अंश

आधी सदी की प्रेमकहानीजहां तक फ्लोरेंतीनो एरिज़ा की बात है तो उसने उस दिन से एक पल भी उसके बारे में बिना सोचे नहीं बिताया था जब लंबे और तकलीफदेह प्रेम संबंध के बाद आज से 51 साल 9 महीने 4 दिन पहले फरमीना डाज़ा ने उसका प्यार ठुकरा दिया …

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