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Tag Archives: gajanan madhav muktibodh

नागार्जुन मुक्तिबोध से बड़े कवि :खगेन्द्र ठाकुर    

पटना अक्सर राजनीति के लिए चर्चा में रहता है। साहित्य की राजनीति भी वहाँ की खूब है। पिछले दिनों प्रगतिशील लेखक संघ ने मुक्तिबोध की याद में आयोजन किया था। उसमें भी लेखकों की राजनीति प्रकट हुई है। इस कार्यक्रम की एक संतुलित रपट भेजी है युवा लेखक सुशील कुमार …

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मुक्तिबोध का लेख ‘दून घाटी में नेहरु’

सुना है पण्डित जवाहरलाल नेहरू एक हफ़्ते छुट्टी पर रहेंगे। ‘आराम हराम है’ का नारा देने वाले नेहरूजी को स्वयं आराम की कितनी जरूरत है, यह किसी से छिपा नहीं। देश-विदेश की हर छोटी-सी घटना उनके संवेदनशील मन को केवल प्रभावित ही नहीं करती, वरन् उन्हें योग्य कार्य करने के …

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एक अनुशासनहीन फेंटेसी है ‘अँधेरे में’

पिछले साल मुक्तिबोध की मृत्यु की अर्ध-शताब्दी थी. इस मौके पर उनके ऊपर खूब कार्यक्रम हुए, थोक के भाव में उनकी रचनाओं को लेकर लेख सामने आये. लेकिन दुर्भाग्य से, किसी लेख में कोई नई बात नहीं दिखी. लगभग सारे लेखों को पढने के बाद यह कह सकता हूँ कि …

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मुक्तिबोध की एक आरंभिक कहानी ‘सौन्‍दर्य के उपासक’

मगहिवि के वेबसाईट हिंदी समय को देख रहा था तो अचानक मुक्तिबोध की १९३५ में प्रकाशित इस कहानी पर ध्यान चला गया. कहानी को पढते ही आपसे साझा करने का मन हुआ- जानकी पुल.  ———————————————————————————————————   कोमल तृणों के उरस्‍थल पर मेघों के प्रेमाश्रु बिखरे पड़े थे। रवि की सांध्‍य …

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