Home / Tag Archives: geetashree

Tag Archives: geetashree

कला में जिसे ‘न्यूड’ कहते हैं वह असल में ‘प्योर फीमेल फॉर्म’ है

जम्मू के पहाड़ी क़स्बे पटनीटॉप के कला शिविर की यात्रा हम उपन्यासकार-कथाकार गीताश्री के लगभग काव्यात्मक रपटों के माध्यम से कर रहे. यह समापन क़िस्त है- मॉडरेटर ==================================== चलते रहते हैं कि चलना है मुसाफिर का नसीब … पक्षी आकाश में कहीं खो चुके हैं, आखिरी बादल भी उड़ा चला …

Read More »

बिकने वाला आर्ट अलग, इतिहास में जाने वाला आर्ट अलग!

गीताश्री के लेखन से मेरा परिचय उनकी रपटों को पढ़कर ही हुआ था. नवभारत टाइम्स से आउटलुक तक. बहुत दिनों बाद पटनीटॉप के कला शिविर को लेकर उनकी रपटें एक के बाद एक पढने को मिल रही हैं. यह तीसरी क़िस्त है- मॉडरेटर ========== आपको अपने सभी सिद्धांतों और विचारों …

Read More »

कला शिविर का रोज़नामचा  -गीताश्री 

जानी-मानी लेखिका गीताश्री आजकल जम्मू के पहाड़ी नगर पटनीटॉप में एक कला शिविर में गई हुई हैं. आने वाले कुछ दिनों तक उनका रोजनामचा नियमित रूप से जानकी पुल पर प्रकाशित होगा. यह पहली किस्त है- मॉडरेटर ============================================================== उनको मालूम नहीं कि बर्फ गिरने से पहले वे दस्तावेज़ों और चित्रों …

Read More »

सियासत की धुन पर मोहब्बत का फ़साना ‘हसीनाबाद’

गीताश्री के पहले उपन्यास ‘हसीनाबाद’ ने इस साल पाठकों-समीक्षकों-आलोचकों का ध्यान अच्छी तरह खींचा. इस उपन्यास की यह समीक्षा युवा लेखक पंकज कौरव ने लिखी है. इधर उनकी कई समीक्षाओं ने मुझे प्रभावित किया. उनमें एक यह भी है- मॉडरेटर ====================== हसीनाबाद के आबाद होने की दास्तान में ही कहीं …

Read More »

स्त्री विमर्श की नई बयानी की कहानी ‘लेडिज सर्किल’

हिंदी के स्त्रीवादी लेखन से एक पाठक के रूप में मेरी एक शिकायत है कि अब यह बहुत प्रेडिक्टेबल हो गई हैं. लिफाफा देखते ही मजमून समझ में आने लगता है. ऐसे में गीताश्री की कहानी ‘लेडिज सर्किल’ चौंकाती है. शुरू में मुझे लगा था कि इसमें भी वही शोषण, …

Read More »

गीताश्री की नई कहानी ‘दमिश्क की भूलभुलैया और अलादीन का चिराग’

गीताश्री मेरी बड़ी बहन हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उनके लिखे को भी मैं उसी तरह से देखता हूँ. बल्कि उनकी कई चर्चित कहानियों का मैं घनघोर आलोचक रहा हूँ. बहरहाल, जो बात उनकी कहानियों के सन्दर्भ में रेखांकित किये जाने के लायक है वह यह है …

Read More »

गीताश्री की नयी कहानी ‘टच मी नॉट’

गीताश्री की कहानियों की रेंज बहुत बड़ी है. दुर्भाग्य से उनकी कहानियों के ऊपर ध्यान नहीं दिया गया है. एक तरफ उन्होंने गाँव-देहातों की सशक्त स्त्री पात्रों को लेकर कहानियां लिखी हैं तो दूसरी तरफ समकालीन जीवन स्थितियां उनकी  में सशक्त तरीके से उभर  हैं. मसलन, यही कहानी।  इसका अंत …

Read More »

गीताश्री की कहानी ‘लकीरें’

गीताश्री वय से वरिष्ठ हैं लेकिन उन्होंने कहानियां लिखना बहुत देर से शुरू किया. शुरू में ही कुछ ऐसी कहानियां लिख दीं कि ‘बोल्डनेस’ का विशेषण चिपक गया उनकी कहानियों के साथ. जबकि उनकी ज्यादातर कहानियां स्त्रियों के सशक्तिकरण की हैं, ग्रामीण, कस्बाई स्त्रियों के धाकड़ व्यक्तित्व की हैं, उनकी …

Read More »

गीताश्री की नायिकाएं बोल्ड हैं क्रूर नहीं

गीताश्री की कहानियों को पढ़े बिना समकालीन स्त्री विमर्श को समझना बहुत मुश्किल है. प्रचार-प्रसार, नारेबाजी से डोर उनकी कहानियां अपनी जमीन पर बहुत मजबूती से खड़ी दिखाई देती हैं. हाल में ही सामायिक प्रकाशन से उनका संग्रह आया है ‘स्वप्न, साजिश और स्त्री’. उसकी कहानियों पर कलावंती का यह …

Read More »

ईश्वर तक जाने वाली पहली राह है प्रार्थना और दूसरी आनंद!

गीताश्री का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है. बस इतना और याद दिलाता चलूँ कि पत्रकारिता, संपादकी की तमाम जिम्मेदारियों को पूरा करते हुए उन्होंने कहानियां भी लिखी हैं, जीवन और जमीन पर जुड़ी कहानियां. उनका एक कहानी संग्रह ‘प्रार्थना के बाहर और अन्य कहानियां’ वाणी प्रकाशन से प्रकाशित …

Read More »