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सियासत की धुन पर मोहब्बत का फ़साना ‘हसीनाबाद’

गीताश्री के पहले उपन्यास ‘हसीनाबाद’ ने इस साल पाठकों-समीक्षकों-आलोचकों का ध्यान अच्छी तरह खींचा. इस उपन्यास की यह समीक्षा युवा लेखक पंकज कौरव ने लिखी है. इधर उनकी कई समीक्षाओं ने मुझे प्रभावित किया. उनमें एक यह भी है- मॉडरेटर ====================== हसीनाबाद के आबाद होने की दास्तान में ही कहीं …

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स्त्री विमर्श की नई बयानी की कहानी ‘लेडिज सर्किल’

हिंदी के स्त्रीवादी लेखन से एक पाठक के रूप में मेरी एक शिकायत है कि अब यह बहुत प्रेडिक्टेबल हो गई हैं. लिफाफा देखते ही मजमून समझ में आने लगता है. ऐसे में गीताश्री की कहानी ‘लेडिज सर्किल’ चौंकाती है. शुरू में मुझे लगा था कि इसमें भी वही शोषण, …

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गीताश्री की नई कहानी ‘दमिश्क की भूलभुलैया और अलादीन का चिराग’

गीताश्री मेरी बड़ी बहन हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उनके लिखे को भी मैं उसी तरह से देखता हूँ. बल्कि उनकी कई चर्चित कहानियों का मैं घनघोर आलोचक रहा हूँ. बहरहाल, जो बात उनकी कहानियों के सन्दर्भ में रेखांकित किये जाने के लायक है वह यह है …

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गीताश्री की नयी कहानी ‘टच मी नॉट’

गीताश्री की कहानियों की रेंज बहुत बड़ी है. दुर्भाग्य से उनकी कहानियों के ऊपर ध्यान नहीं दिया गया है. एक तरफ उन्होंने गाँव-देहातों की सशक्त स्त्री पात्रों को लेकर कहानियां लिखी हैं तो दूसरी तरफ समकालीन जीवन स्थितियां उनकी  में सशक्त तरीके से उभर  हैं. मसलन, यही कहानी।  इसका अंत …

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गीताश्री की कहानी ‘लकीरें’

गीताश्री वय से वरिष्ठ हैं लेकिन उन्होंने कहानियां लिखना बहुत देर से शुरू किया. शुरू में ही कुछ ऐसी कहानियां लिख दीं कि ‘बोल्डनेस’ का विशेषण चिपक गया उनकी कहानियों के साथ. जबकि उनकी ज्यादातर कहानियां स्त्रियों के सशक्तिकरण की हैं, ग्रामीण, कस्बाई स्त्रियों के धाकड़ व्यक्तित्व की हैं, उनकी …

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गीताश्री की नायिकाएं बोल्ड हैं क्रूर नहीं

गीताश्री की कहानियों को पढ़े बिना समकालीन स्त्री विमर्श को समझना बहुत मुश्किल है. प्रचार-प्रसार, नारेबाजी से डोर उनकी कहानियां अपनी जमीन पर बहुत मजबूती से खड़ी दिखाई देती हैं. हाल में ही सामायिक प्रकाशन से उनका संग्रह आया है ‘स्वप्न, साजिश और स्त्री’. उसकी कहानियों पर कलावंती का यह …

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ईश्वर तक जाने वाली पहली राह है प्रार्थना और दूसरी आनंद!

गीताश्री का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है. बस इतना और याद दिलाता चलूँ कि पत्रकारिता, संपादकी की तमाम जिम्मेदारियों को पूरा करते हुए उन्होंने कहानियां भी लिखी हैं, जीवन और जमीन पर जुड़ी कहानियां. उनका एक कहानी संग्रह ‘प्रार्थना के बाहर और अन्य कहानियां’ वाणी प्रकाशन से प्रकाशित …

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और हँसी निष्कासित है अपने समय से

वरिष्ठ पत्रकार-लेखिका गीताश्री इन दिनों ‘कविया’ गई हैं. पिछले कुछ सालों में कुछ(सारी नहीं) अच्छी कहानियां लिखने के बाद उन्होंने अभिव्यक्ति का खतरा कविता में उठाया है. अब देखिये न क्या तासीर है इन कविताओं की कि जबसे इनको जानकी पुल पर लगाने के बारे में सोचा है रात से …

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वह बच्चा किसका है?

विश्व पुस्तक मेले में इस साल प्रसिद्ध पत्रकार, कथाकार गीताश्री की पुस्तक ‘सपनों की मंडी’ की बड़ी चर्चा रही. प्रस्तुत है उसी पुस्तक का एक अंश- जानकी पुल.  ————————————————————–  कोई सुबह–सुबहअखवारबांटताहै।कोईघरोंकेबाहररखेकूड़ेकेथैलेकोउठाकरले  जाता है।कोईसब्जीबेचताहैतोकोईकपड़ेप्रेसकरताहै।कोईकिरानेकीदुकानपरखड़ारहताहैऔरआर्डरपरआएसामानोंकोघरोंमेंपहुंचाताहैकोईरातभरकिसीअपार्टमेंटकेबाहरखड़ेहोकरचौकीदारीकरताहै।महानगरकेबहुमंजिलीसंस्कृतिमेंजीनेकेआदीहोचुकेलोगोंमेंशायदहीकिसीकोयेसोचनेकीफुरसतहोकिकौनहैंवेलोग,जोसुबहहोतेहीशुरुहोजातेहैंऔरदेररातकेबादकहांगायबहोजातेहैंकिसीकोनहींमालूम।कौनहैंवेलोग? क्याहमउनकेनामजानतेहैं? वेकहांसेआतेहैं? शहरमेंवेकिसतरहगुजर–बसरकरतेहैं? वेकहांरहतेहैं? क्याहमउनकीपरवाहकरतेहैं? शायदनहीं, लेकिनअगरकोईपरवाहकरनेनिकलेतो? तोफिरआपकासामनाहाहाकारभरेऐसे–ऐसेसचसेहोगा, जिसपरयकीनकरनामुश्किलहोजाएगा। मुंबई केमशहूरलियोपोर्डकीसंगीतभरीरातोंकेसामने10 से12 सालकेबीसयोंबच्चेअक्सरखड़ेमिलतेहैं।शायदआपनेभीउन्हेंदेखाहो, लेकिनक्याआपकोपताहैकि  वे उनशोषितबच्चोंकेसमूहसेहैंजोशहरकेफुटपाथोंपरजूतेयाकारचमकातेहैं, फूल, …

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रचनात्मकता एक अंधड़ है मेरे लिए

वरिष्ठ पत्रकार, कथाकार गीताश्री को उनकी सम्पादित पुस्तक ‘नागपाश में स्त्री’ के लिए वर्ष २०११ का सृजनगाथा सम्मान दिए जाने की घोषणा हुई है. उनको जानकी पुल की ओर से बहुत बधाई. प्रस्तुत है इस अवसर पर उनका लेख जो उनके अपने ही कहानी लेखन को लेकर है- जानकी पुल. …

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