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Tag Archives: giriraj kiraroo

गिरिराज किराडू की नई कविताएं

गिरिराज किराडू मेरी पीढ़ी के उन कवियों में हैं जिनकी कविताओं ने मुझे हमेशा प्रभावित किया है. उनका अपना एक विशिष्ट मुहावरा है और शब्दों का संयम. आज उनकी कुछ नई कविताएं- प्रभात रंजन  ==== ==== मिस्टर के की दुनिया: पिता होने की कोशिश के बारे में कुछ कविताएँ गिरिराज …

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‘कसप’ प्रेम की क्रांतिकारी भूमिका की असफलता की कथा है

युवा कवि-संपादक-आलोचक गिरिराज किराडू ने मनोहर श्याम जोशी की 80 वीं जयंती के अवसर पर उनके उपन्यास पर गहरी सूझ भरा यह लेख लिखा है. हमारे आग्रह पर गिरिराज जोशी जी के उपन्यासों पर कुछ और लेख भी लिखेंगे. लेखक के आग्रह पर तस्वीर के साथ जीन सिम्मंस की तस्वीर ही …

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गिरिराज किराडू का पत्र श्री अशोक वाजपेयी के नाम

श्री अशोक वाजपेयी जी का जो ईमेल हमने सार्वजनिक किया था उसके सन्दर्भ में गिरिराज किराडू का यह ईमेल हमें मिला है, जो दरअसल अशोक जी के नाम उनका पत्र है. आप इस पत्र को पढ़ें और इस पूरे प्रकरण को एक नए आलोक में समझने का प्रयास करें. यह …

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कविता-आयोजनों की बहुलता ने फिर से कविता को जेरे-बहस किया है

कान्हा में प्रकृति के ‘सान्निध्य’ में कवियों के मिलन की चर्चा ने कुछ दूसरा ही रंग पकड़ लिया है. लेकिन वहां केवल दक्षिण-वाम का मिलन ही नहीं हो रहा था, कविता को लेकर कुछ गंभीर चर्चाएँ भी हुईं. कवि गिरिराज किराड़ू का यह लेख पढ़ लीजिए, जो कवियों के ‘सान्निध्य’ …

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काफ़िर जिसे सुन नहीं सकते

गिरिराज किराडू की कविताएँ बगैर किसी हो-हल्ले के, बगैर कोई चीख-पुकार मचाये बहुत कुछ कह जाती हैं. ८ जुलाई की शाम इण्डिया हेबिटेट सेंटर में ‘कवि के साथ’ में दिल्लीवालों के लिए इस निराले कवि को सुनने का अवसर होगा जो कविता में सहजता का कायल है. हिंदी की दूसरी …

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बच्चन सिनेमा और उसकी ईर्ष्यालु संतति

अनुराग कश्यप ने सिनेमा की जैसी बौद्धिक संभावनाएं जगाई थीं उनकी फ़िल्में उन संभावनाओं पर वैसी खरी नहीं उतर पाती हैं. ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ का भी वही हाल हुआ. इस फिल्म ने सिनेमा देखने वाले बौद्धिक समाज को सबसे अधिक निराश किया है. हमारे विशेष आग्रह पर कवि-संपादक-आलोचक गिरिराज किराडू ने …

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संतों घर में झगरा भारी!

कल हमने जनसत्ता संपादक ओम थानवी का लेख ‘आवाजाही के हक में‘ जनसत्ता से साभार लगाया था. फेसबुक और ब्लॉग्स पर गुंटर ग्रास की कविता, विष्णु खरे और मंगलेश डबराल को लेकर चली बहसों के सन्दर्भ में उस लेख में जो सवाल उठाये गए उसने उन बहसों को एक बात फिर बहसतलब …

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साहित्य ‘कुबड़ों का टूर्नामेंट’ है

गिरिराज किराडू हिंदी के ‘भारतभूषण’ कवि हैं, प्रतिलिपि.इन के कल्पनाशील संपादक हैं, प्रतिलिपि बुक्स के निदेशक हैं, कुछ अलग तरह के साहित्यिक आयोजनों से जुड़े हैं. आज उनकी यह डायरी का अंश जो साहित्यिक आयोजनों के एक और पहलू से हमें रूबरू करवाती है- जानकी पुल. एक लेखक–आयोजक की डायरी: …

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स्मृति मेरे काव्यशास्त्र से बाहर है

7-8 जनवरी को जयपुर में ‘कविता समय’ का दूसरा आयोजन है, जो संयोग से कवियों और कविता का सबसे बड़ा आयोजन बनता जा रहा है. इस मौके पर हम कुछ कवियों की चुनी हुई कविताएँ प्रस्तुत करेंगे. शुरुआत अपने प्रिय कवि गिरिराज किराडू की कविताओं से कर रहे हैं. गिरिराज …

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विनम्र कवि को नोबेल

कवि-संपादक गिरिराज किराडू ने यह लेख टोमास ट्रांसट्रोमर की कविता और उनको मिले नोबेल सम्मान पर लिखा है. यह छोटा-सा लेख न केवल ट्रांसट्रोमर की कविता को समझने में हमारी मदद  करती है बल्कि नोबेल की पोलिटिक्स की ओर भी संकेत करती है. बेहद पठनीय लेकिन विद्वत्तापूर्ण लेख- जानकी पुल.  …

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