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Tag Archives: giriraj kiraroo

विनम्र कवि को नोबेल

कवि-संपादक गिरिराज किराडू ने यह लेख टोमास ट्रांसट्रोमर की कविता और उनको मिले नोबेल सम्मान पर लिखा है. यह छोटा-सा लेख न केवल ट्रांसट्रोमर की कविता को समझने में हमारी मदद  करती है बल्कि नोबेल की पोलिटिक्स की ओर भी संकेत करती है. बेहद पठनीय लेकिन विद्वत्तापूर्ण लेख- जानकी पुल.  …

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अनुवाद, ‘एकांत’ और किस्सा इमामुद्दीन

प्रसिद्ध कवि, प्रतिलिपि.इन के संपादक गिरिराज किराड़ू का एक दुर्लभ गद्य, जिसमें संस्मरण के बहाने उन्होंने बहुत सारे ऐसे प्रसंग उठाये हैं जिसमें साहित्य है, शहरों-कस्बों का परिवेश है उनमें भटकता जीवन है- जानकी पुल. प्रताप नगर, जयपुर  हनीफ़ कुरैशी का संसार एकदम अलग है. उसका लेखन भी. मैं उस …

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किसी यूरोपियन के सामने खड़े हो कर हम अपने को नीचा समझते हैं

  ओरहान पामुक का प्रसिद्द उपन्यास ‘स्नो’ पेंगुइन’ से छपकर हिंदी में आनेवाला है. उसी उपन्यास के एक चरित्र ‘ब्लू’, जो आतंकवादी है, पर गिरिराज किराड़ू ने यह दिलचस्प लेख लिखा है, जो आतंकवाद, उसकी राजनीति के साथ-साथ अस्मिता के सवालों को भी उठाता है- जानकी पुल.       …

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ग़ौर से देखिये ये नदी का कब्रिस्तान है

 गिरिराज  किराडू हिंदी युवा-कविता का ऐसा नाम है जिसने कविताओं के रूप-रंग को लेकर सबसे अधिक प्रयोग किए हैं, अभिव्यक्ति के खतरे निरंतर उठाते रहे हैं. इस बार उनकी कविताएँ कुछ नए अंदाज़ में- जानकी पुल. 1. कुफ़्र  कुछ हुआ चाहियेयहाँ  एक नदी बहती थी अब रेगिस्तान  है गौर से देखिये ये नदी  का …

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गिरिराज किराड़ू की छः कविताएँ

कवि गिरिराज किराडू की ये आरंभिक कविताएँ हैं. जब ‘बहुवचन’ के प्रवेशांक में ये प्रकाशित हुई थीं तो अपने खिच्चेपन से इन्होने ध्यान आकर्षित किया था. यह कवि सफल कविता के बने-बनाये मुहावरों में शब्द नहीं बिठाता अपना मुहावरा बनाने की बेचैनी इन कविताओं में साफ़ दिखाई देती है. एक …

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सरस्वती मिनरल वॉटर प्राईवेट लिमिटेड

मूलतः कवि गिरिराज किराड़ू अपने प्रयोगधर्मी गद्य के लिए भी पहचाने जाते हैं. पिछले दिनों उनकी कुछ कहानियों ने अपने शिल्प, अपनी किस्सागोई से प्रभावित किया. नॉन–फिक्शन में भी उन्होंने खासे प्रयोग किये हैं. काफी गंभीर बात खिलंदड़े अंदाज़ में कह जाना उनकी शैली की एक विशेषता है. प्रस्तुत है …

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