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Tag Archives: hind yugm

हिंदी में मोटिवेशनल किताबों के अभाव को दूर करने वाली पुस्तक

जब से यूपीएससी के रिज़ल्ट आए हैं इस बात को लेकर बड़ी चर्चा है कि हिंदी मीडियम के प्रतिभागियों का चयन कम होता जा रहा है। मुझे निशांत जैन की याद आई। उनकी किताब ‘रुक जाना नहीं’ की याद आई। निशांत जैन आईएएस हैं लेकिन उससे बड़ी बात है कि …

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मातृत्व के अनदेखे पहलू टटोलता उपन्यास ‘इब्नेबतूती’

दिव्य प्रकाश दुबे का नया उपन्यास आया है ‘इब्नेबतूती’। वे नई वाली हिंदी के पहले पोस्टर बॉय रहे हैं। उनके पाठकों की तादाद बड़ी है। उनके इस उपन्यास पर मैं बाद में लिखूँगा। फ़िलहाल युवा लेखक पीयूष द्विवेदी की लिखी समीक्षा पढ़िए- ========  ‘माँ’ एक ऐसा विषय है, जिसे केंद्र …

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‘लौंडे शेर होते हैं’ उपन्यास का एक अंश

आज युवा लेखन में तरह तरह के प्रयोग हो रहे हैं। कथा से लेकर शीर्षक तक तरह तरह के आ रहे हैं। युवा पाठकों को हिंदी से जोड़ पाने में इस तरह के प्रयास सार्थक भी हो रहे हैं। हिंद युग्म से ऐसा ही एक उपन्यास आया है कुशल सिंह …

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वसीम अकरम के उपन्यास ‘चिरकुट दास चिंगारी’ का एक अंश

प्रस्तुत है युवा लेखक वसीम अकरम के उपन्यास ‘चिरकुट दास चिंगारी’ का एक अंश। उपन्यास हिंद युग्म से प्रकाशित हुआ है- मॉडरेटर ==================================== उपन्यास के तीसरे अध्याय ‘इक्स’ का एक अंश मारकपुर से कोस भर की दूरी पर सप्ताह में दो दिन बजार लगता था– मंगलवार को और इतवार को। …

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सत्य व्यास के बहुप्रतीक्षित उपन्यास ‘चौरासी’ का एक अंश

सत्य व्यास के लेखन ने निस्संदेह हिन्दी के युवा लेखकों-पाठकों में नए उत्साह का संचार किया है। उपन्यास की प्री बुकिंग करवाकर मैं भी बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहा हूँ। फिलहाल उपन्यास के एक पठनीय अंश का आनंद लेते हैं- प्रभात रंजन ================= कहानियों को गंभीर और अलग बनाने के बहुत …

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निखिल सचान के उपन्यास ‘यूपी 65’ का एक अंश

हिन्द युग्म ने नई वाली हिंदी के नारे के साथ टेक्नो लेखकों(इंजीनियरिंग-मैनेजमेंट की पृष्ठभूमि के हिंदी लेखक) की एक नई खेप हिंदी को दी. जिसके सबसे पहले पोस्टर बॉय निखिल सचान थे. उनकी किताब ‘नमक स्वादानुसार’ की 3-4 साल पहले अच्छी चर्चा हुई थी. हालाँकि उनकी दूसरी किताब का नाम …

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‘बनारस टॉकीज’ का एक ट्रेलर

हिन्द युग्म प्रकाशन ने हिंदी में अलग ढंग की किताबें छापकर एक नई शुरुआत की. लेखकों और पाठकों के बीच के खोये हुए रिश्तों को जोड़ने का उनका प्रयास सफल रहा. इस प्रकाशन की अगली किताब है ‘बनारस टॉकीज’. लेखक हैं सत्य व्यास. उसी पुस्तक का एक रोचक अंश- मॉडरेटर  …

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हिंदी की पहली एडल्ट किताब पर एक लेख

फ्रैंक हुज़ूर की किताब आई है ‘सोहो: जिस्म से रूह का सफ़र’. पोर्न इंडस्ट्री की हैरतनाक सच्चाइयों से रूबरू करवाती हिंदी में पहली किताब है. इसके आरम्भ में लिखा हुआ है ‘18 वर्ष से अधिक आयु के पाठकों के लिए.’ मेरे जानते यह घोषित रूप से हिंदी की पहली वयस्क किताब …

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