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Tag Archives: hindi diwas

आत्मनिर्भरता का  लक्ष्य और मातृभाषा में शिक्षा

अशोक महेश्वरी का यह लेख भारतीय भाषाओं में शिक्षा और आत्मनिर्भरता को लक्ष्य करके लिखा गया है। इस लेख में उन्होंने कई महत्वपूर्ण बिंदु उठाए हैं, जैसे यह कि बाजार की दृष्टि से भारतीय भाषाओं का आकलन किया ही नहीं गया। भारतीय भाषाओं के बीच आपसी आदान-प्रदान के माध्यम से …

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हिन्दी दिवस – कथा का उपसंहार: नवीन चौधरी

नवीन चौधरी ‘जनता स्टोर’ के लेखक हैं, किताबों की मार्केटिंग के क्षेत्र के अनुभवी व्यक्ति है। हिंदी के नए पाठकों को लेकर उनका यह सर्वेक्षण नए पाठकों के मानस को समझने में बहुत मदद करने वाला है। आप भी पढ़िए- ==================== 14 तारीख को धूमधाम से हिन्दी दिवस मनाया गया। …

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हिंदी को नवजीवन कैसे मिले!

हिंदी दिवस आने वाला है। हिंदी की दशा दिशा को लेकर गम्भीर चर्चाएँ हो रही हैं। क्या खोया? क्या पाया? आज यह लेख पढ़िए जिसे लिखा है युवा लेखक और राजकमल प्रकाशन समूह के संपादकीय निदेशक सत्यानंद निरुपम ने। भाषा के अतीत-भविष्य, सम्पन्नता-विपन्नता को लेकर उन्होंने कुछ गम्भीर बिंदु उठाए हैं …

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क्या हिंदी, हिंदी ढंग की हो गई है?

दिल्ली विश्वविद्यालय में हिंदी पढ़ने से लेकर पढ़ाने तक के अनुभवों को लेकर एक लेख कल दैनिक जागरण में प्रकाशित हुआ। तीस साल पहले कंप्लीट अंग्रेज़ीदां माहौल में दिल्ली विश्वविद्यालय कैंपस में हिंदी के विद्यार्थियों के लिए परीक्षा पास होने से बड़ी चुनौती अंग्रेजियत की परीक्षा पास होने की होती …

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वनडे गेम बनकर रह गया है ‘हिंदी दिवस’ 

आज हिंदी दिवस पर सदानंद पॉल का आलेख. सदानंद जी कटिहार के पास एक कस्बे में हिंदी पढ़ाते हैं और आरटीआई एक्टिविस्ट हैं. बहुत मौलिक बातें लिखते हैं- मॉडरेटर _________________________________________________________ 1949 के 14 सितम्बर को संविधान सभा ने हिंदी को राजभाषा के रूप में अपनाया, इसलिए इस तिथि को ‘हिंदी …

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