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हरि मृदुल की कहानी ‘आलू’

हरि मृदुल संवेदनशील कवि और कथाकार हैं। छपने छपाने से ज़रा दूरी बरतते हैं लेकिन लिखने से नहीं। जीवन के छोटे छोटे अनुभवों को बड़े रूपक में बदलने में दक्ष हैं। बानगी के तौर पर यह कहानी पढ़िए- ======================== फु ऽऽ स्स… मुझे पता था कि यही होना है! इसीलिए मैं चाहता था कि हसु खुद यह पैकेट खोले। हालांकि उसने कोशिश तो पूरी की थी, लेकिन वह खोल नहीं पाया। ‘ऐेसे खोलो, ऐसे’, मैंने इस काम से बचने का आखिरी प्रयत्न किया। परंतु हसु से पैकेट नहीं खुला। आखिरकार उसने मेरे हाथों में थमा दिया। ‘पापा खोल दो ना, आप ऐसा क्या करते हो?’ हसु चिढ़़ गया। ‘अब तेरा यही ड्रामा रहेगा। अपनी मम्मी को दे ना,’ मैंने चालाकी दिखाने का फिर से प्रयास किया। चूकि नेहा पानी की बोतल खरीदने के लिए पर्स में छुट्टे रुपए ढूंढ़ रही थी, सो वह भी झुंझला पड़़ी — ‘कमाल है, बच्चे का इतना सा काम करने में भी आलस आ रहा है। मैं तो इसे पूरा दिन संभालती हूं। खोलिए पैकेट।’ मैं कोई जवाब देता, वह पानी की बोतल खरीदने जा चुकी थी। ‘ला, हसु बेटा। आज पूरे दिन पापा को ऐसे ही तंग करना हां’, यह कहते हुए मैंने पैकेट का एक कोना दांतों से दबाकर फाड़़ा और हसु को दे दिया। फु  ऽऽ   स्स…। …

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मृणाल पाण्डे की कहानी ‘निर्बुद्धि राजा और देशभक्त चिड़ियों की कथा’

प्रसिद्ध लेखिका मृणाल पाण्डे इन दिनों कथा ऋंखला लिख रही हैं- बच्चों को न सुनाने लायक बालकथा। यह उस सीरिज़ की छठी कथा है। जितनी प्राचीन उतनी ही समकालीन। इतिहास अपने आपको दुहराता है या नहीं लेकिन कथाएँ अपने आपको दुहराती हैं। एक रोचक, पठनीय और प्रासंगिक कथा का आनंद …

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निधि अग्रवाल की कहानी ‘यमुना बैंक की वह मेट्रो’

निधि अग्रवाल पेशे से डॉक्टर हैं। अच्छा लिखती हैं। पिछले दिनों उन्होंने जानकी पुल पर मैत्रेयी देवी के उपन्यास ‘न हन्यते’ पर जानकी पुल पर बहुत अच्छी टिप्पणी लिखी थी। आज उनकी एक दिलचस्प कहानी पढ़िए, दिल्ली मेट्रो के सफ़र पर- ================================= एनसीआर में और कुछ अच्छा हुआ हो या …

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ईशान त्रिवेदी की कहानी ‘गुलाबी पेड़’

ईशान त्रिवेदी टीवी, फ़िल्मों की दुनिया के जाने पहचाने नाम हैं। आजकल उनकी लिखी वेबसीरिज़ सोनी पर दिखाई जा रही है ‘योर ऑनर’। वे अच्छे लेखक हैं। राजकमल प्रकाशन समूह से हाल में उनका उपन्यास प्रकाशित हुआ है ‘पीपलटोले के लौंडे’। उनकी कहानियाँ हम जानकी पुल पर पढ़ते रहे हैं। …

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मृणाल पाण्डे की कथा: लोल लठैत और विद्या का घड़ा

बच्चों को न सुनाने लायक बालकथा -3 प्रसिद्ध लेखिका मृणाल पांडे अपने लेखन में निरंतर प्रयोग करती रहती हैं। हाल के वर्षों में जितने कथा प्रयोग मृणाल जी ने किए हैं उतने कम लेखकों ने ही किए होंगे। बच्चों को न सुनाने लायक बालकथा उनकी नई सीरिज़ है जिसमें वह …

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निवेदिता की कहानी ‘जड़ें बुलाती हैं!’

निवेदिता जी लेखिका, हैं कवयित्री हैं और समर्पित ऐक्टिविस्ट हैं। उनकी इस कहानी में समकालीन संदर्भों में विस्थापन के दर्द को समझिए। उन लोगों के दर्द को जिनका न परदेस बचा न देस- जानकी पुल। ========================= आसमान में बादल नहीं है। लू के नुकीले नाखूनों ने उसके पुरसुकुन चेहरे को …

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