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अनुकृति उपाध्याय के कथा संग्रह ‘जापानी सराय’ की भूमिका

अनुकृति उपाध्याय हिंदी कहानीकारों की जमात में नई हैं लेकिन उनकी कहानियां बहुत अलग तरह की हैं. उनका पहला कथा संग्रह राजपाल एंड संज से प्रकाशित हुआ है ‘जापानी सराय’. जिसकी भूमिका लिखी है सुप्रसिद्ध कथाकार हृषिकेश सुलभ ने. फिलहाल आप भूमिका पढ़िए- मॉडरेटर ========= समकालीन हि‍न्‍दी कहानी का परि‍दृश्‍य …

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हृषिकेश सुलभ की कहानी ‘हबि डार्लिंग’

आज जाने माने लेखक हृषिकेश सुलभ का जन्म दिवस है. उनको पढ़ते हुए हम जैसे लेखकों ने लिखना सीखा. आज जानकी पुल की तरफ से उनको बधाई. वे इसी तरह हमें प्रेरणा देते रहें- मॉडरेटर ===========      उस रात एक आदिम गंध पसरी हुई थी। यह गंध उसके रन्ध्रों से …

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हृषीकेश सुलभ की कहानी ‘वधस्थल से छलांग’

हृषीकेश सुलभ हिंदी की वरिष्ठ पीढ़ी के सबसे प्रासंगिक लेखकों में है. मेरी नजर में बड़ा लेखक वह नहीं होता जो अपने समय में दो-चार अच्छी कहानियां लिखकर खुद को कालजयी समझने लगता है. बड़ा लेखक वह होता है जो हर दौर में समकालीन बना रहता है. बदलते समय के अनुसार …

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खरीद बिक्री के आंकड़े साहित्य के मूल्य तय नहीं करते- ऋषिकेश सुलभ

आज ऋषिकेश सुलभ का जन्मदिन है. वरिष्ठ पीढ़ी के सबसे सक्रिय लेखकों में एक सुलभ जी ने अपने नाटकों, अपनी कहानियों से एक बड़ा पाठक वर्ग बनाया है. सबसे बड़ी बात यह है कि बिहार के वे उन दुर्लभ लेखकों में हैं जिन्होंने समकालीन युवा लेखकों से निरंतर संवाद बनाया …

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हृषीकेश सुलभ कथाकार हैं, क्रॉनिकल राइटर नहीं!

हृषीकेश सुलभ के छठे कहानी संग्रह ‘हलंत’ की कहानियों को पढ़ते हुए यह मैंने लिखा है- प्रभात रंजन  ==== ==== हृषीकेश सुलभ की कहानियों का छठा संग्रह ‘हलंत’ पढ़ते हुए बार बार इस बात का ध्यान आया कि संभवतः वे हिंदी के अकेले समकालीन कथाकार हैं जिनकी कहानियों का कंटेंट …

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लुक छिप बदरा में चमके जैसे चनवा…

जाने माने रंगकर्मी, कथाकार, लोक कलाओं के माहिर विद्वान हृषिकेश सुलभ का यह षष्ठी योग का वर्ष है, इसलिए जानकी पुल पर हम समय समय पर उनकी रचनाएँ, उनके रचनाकर्म से जुड़ी सामग्री देते रहेंगे. आज प्रस्तुत है एक बातचीत जो की है मुन्ना कुमार पाण्डे और अमितेश कुमार ने- …

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हृषीकेश सुलभ की कहानी ‘हबि डार्लिंग’

हृषीकेश सुलभ बिहार की धरती के सम्भवतः सबसे मौलिक इस रचनाकार ने अपने नाटकों में लोक के रंग को जीवित किया तो कहानियों में व्यंग्य बोध के साथ वाचिकता की परंपरा को. समकालीन जीवन की विडंबनाएं जिस सहजता से उनकी कहानियों में आती हैं, जिस परिवेश, जिस जीवन से वे कहानियां …

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