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Tag Archives: manoj kumar pandey

आज के संकट और हिंदी कहानी: मनोज कुमार पांडेय

हिंदी कहानी की समकालीन चुनौतियों पर पढ़िए जाने माने कथाकार मनोज कुमार पांडेय का यह लेख- ========================== सबसे पहले तो यही सवाल उठता है कि आज के संकट कौन से हैं जिनसे हमारे लोग दो-चार हैं। इनका स्वरूप क्या है? इनका इतिहास भूगोल क्या है? वे अभी-अभी पैदा हुए हैं …

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हिंदी प्रकाशन जगत में एक नई पहल!

एक स्वागतयोग्य खबर- ============== हिंदी के दो अत्यंत प्रतिष्ठित प्रकाशनों–लोकभारती प्रकाशन (इलाहाबाद) और राधाकृष्ण प्रकाशन (नई दिल्ली)–ने बदले समय के अनुरूप अपनी तैयारी शुरू कर दी है। हाल ही में इन दोनों विशिष्ट प्रकाशनों ने पेशेवराना रूख अपनाते हुए महत्त्वपूर्ण नियुक्तियाँ की हैं जो कि हिंदी में एक नई शुरुआत …

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मनोज कुमार पांडेय की कहानी “बिना ‘काम’ के जीवन”

मनोज कुमार पांडेय समकालीन कथाकारों में अपने राजनीतिक स्वर के कारण अलग से पहचाने जाते हैं। उनका कहानी संग्रह ‘बदलता हुआ देश’ राजकमल प्रकाशन से इसी साल प्रकाशित हुआ है। उसी संग्रह से एक कहानी पढ़िए- मॉडरेटर ==================================== स्वर्णदेश के लोगों को ‘काम’ के बारे में बात करना बिलकुल भी …

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मनोज कुमार पांडेय की कहानी ‘पापियों के उद्धार की अनोखी योजना’

मनोज कुमार पांडेय मेरी पीढ़ी के उन कथाकारों में हैं जो न सिर्फ निरंतर लिख रहे हैं बल्कि नए-नए कथा-प्रयोग भी कर रहे हैं. यह उनकी नई कहानी है जो लक्षणा और व्यंजना में पढ़े जाने की मांग करती है- प्रभात रंजन ================ स्वर्णदेश का राजा उन लोगों के लिए …

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मनोज कुमार पाण्डेय की कहानी ‘मदीना’

मनोज कुमार पाण्डेय समकालीन लेखकों में सबसे नियमित और निरंतर कुछ बेहतर लिखने के लिए जाने जाते हैं. उनकी यह नई कहानी भी इसी ताकीद करती है- मॉडरेटर  ========================================== गाँव में मेरा घर गाँव से थोड़ा परे हटकर था। पूरा गाँव जहाँ हरियाली और रास्ता था वहीं मेरे घर के आसपास …

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आप भाग्यशाली हैं कि आप के पास अपना कहने के लिए एक देश है

कथाकार मनोज कुमार पाण्डे बहुत तार्किक ढंग से वैचारिक लेख लिखते हैं. आज़ादी को याद करने के मौसम में उनका यह लेख पढियेगा- मॉडरेटर  ============================== आज के लगभग सत्तर साल पहले हमें वह आजादी मिली जिसे आज हम पाठ्य पुस्तकों में आजादी के नाम से पढ़ते जानते हैं। तब से …

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मनोज कुमार पांडेय की कहानी ‘घंटा’

मनोज कुमार पांडेय अपनी पीढ़ी के मेरे कुछ प्रिय कथाकारों में हैं. उनकी यह नई कहानी “घंटा’ आई है ‘पल-प्रतिपल’ पत्रिका. पत्रिका तो कहीं मिलती नहीं है सोचा यह कहानी ही पढ़ी पढ़ाई जाए- प्रभात रंजन  ============================================================ जैसा कि कहने का चलन है, इस कहानी की समूची कथा स्थितियाँ और …

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