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Tag Archives: piyush dwivedi

जब ग़ज़ल नहीं बुन पाता हूँ कहानी बुनने लगता हूँ- गौतम राजऋषि

गौतम राजऋषि भारतीय सेना में कर्नल हैं लेकिन हम हिंदी वालों के लिए वे शायर हैं, ‘हरी मुस्कुराहटों का कोलाज’ के कथाकार हैं, साहित्यिक बहसों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाले लेखक हैं. उनसे एक बेलाग और बेबाक बातचीत की है युवा लेखक पीयूष द्विवेदी ने- मॉडरेटर =================================================== सवाल – ये …

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निर्मल वर्मा को जब भी पढ़ती हूँ तो चकित होती हूँ- ममता सिंह

रेडियो की प्रसिद्ध एंकर ममता सिंह की कहानियां हम सब पढ़ते रहे हैं. हाल में ही राजपाल एंड संज प्रकाशन से उनकी कहानियों का पहला संकलन आया है ‘राग मारवा’, उसी को सन्दर्भ बनाकर युवा लेखक पीयूष द्विवेदी ने उनसे एक बातचीत की. आपके लिए- मॉडरेटर ==============================================   सवाल – …

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कहानियां तो हैं लेकिन कौशल की कमी है!

विजयश्री तनवीर के कथा-संग्रह ‘अनुपमा गांगुली का चौथा प्यार’ की सम्यक समीक्षा युवा लेखक पीयूष द्विवेदी द्वारा- मॉडरेटर ================== विजयश्री तनवीर के पहले कहानी-संग्रह ‘अनुपमा गांगुली का चौथा प्यार’ में कुल नौ कहानियां हैं, जिनमें से सभी के केंद्र में विवाहेतर संबंधों का विषय है। संग्रह की पहली कहानी ‘पहले …

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अधूरेपन की पूरी कहानी

इस साल के चर्चित उपन्यासों में एक उपन्यास भगवंत अनमोल का उपन्यास ‘जिंदगी 50-50’ भी रहा है। उसकी एक समीक्षा आज पीयूष द्विवेदी भारत के शब्दों में- मॉडरेटर ============================== भगवंत अनमोल के उपन्यास ‘ज़िन्दगी 50 50’ के विषय में प्रचलित यह है कि इसका कथानक किन्नर समाज की त्रासदियों पर …

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परिवार, प्रेम और सोशल मीडिया की व्यथा-कथा

सुपरिचित लेखक विमलेश त्रिपाठी के उपन्यास ‘हमन हैं इश्क मस्ताना’ की आजकल बहुत चर्चा है. हिन्द युग्म से प्रकाशित इस उपन्यास की समीक्षा लिखी है पीयूष द्विवेदी ने- मॉडरेटर ================================ विमलेश त्रिपाठी का उपन्यास ‘हमन हैं इश्क मस्ताना’ पारिवारिक जीवन के तनावपूर्ण यथार्थ की तरफ से आँखें मूंदे सोशल मीडिया …

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भविष्य का भयावह कथानक है ‘रेखना मेरी जान’

‘रेखना मेरी जान’– रत्नेश्वर सिंह के इस उपन्यास की छपने से पहले जितनी चर्चा हुई छपने के बाद इसके अलग तरह के कथानक की चर्चा कम ही हुई. यह हिंदी का पहले उपन्यास है जिसका विषय ग्लोबल वार्मिंग है, जो केवल भारत की कहानी नहीं कहता. इसकी एक विस्तृत समीक्षा …

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