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Tag Archives: prabhat ranjan

जेंटलमैन लेखक थे विजय मोहन सिंह

विजय मोहन सिंह नहीं रहे. यह सुनते ही सबसे पहले मन हिन्दू कॉलेज होस्टल के दिनों में वापस चला गया. मेरा दोस्त आनंद विजय उनका नाम लेता था, कहता था बड़े लेखक हैं. उसके पिता के साथ उन्होंने कभी महाराजा कॉलेज, आरा में अध्यापन किया था. विजय मोहन जी को …

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अमेजन क्रांति के दौर में हिदी किताबें और पाठक

परसों बिहार के कटिहार से संजय जी का फोन आया था. फोन उठाते ही उन्होंने कहा कि वे करीब एक साल से जानकी पुल समय मिलने पर जरूर पढ़ते हैं. छौ ईंच स्क्रीन वाला मोबाइल फोन ले लिए हैं. ‘ई लप्रेक क्या है?’ उन्होंने छूटते ही पूछा. कहा कि आप …

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विश्व पुस्तक में क्या रहे ट्रेंड?

इस बार पुस्तक मेले में चार दिन जाना हुआ. पहले सोचा था नहीं जाऊँगा. लेकिन एक बार जाइए तो बार-बार जाने का मन करता है. एक साथ इतने बड़े लेखकों से मुलाकात, बातें, बतकही- अच्छा लगने लगता है. आज लिख रहा हूँ तो सबकी याद आ रही है. अच्छा मौका …

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डीयू का बिहार कनेक्शन और अंग्रेजी उपन्यास

लोकप्रिय अंग्रेजी उपन्यासों का यह साल दिल्ली विश्वविद्यालय के नाम रहा. दिल्ली विश्वविद्यालय का बिहार कनेक्शन इस साल अंग्रेजी के लोकप्रिय उपन्यासों का सबसे कारगर मुहावरा रहा. रविंदर सिंह का उपन्यास ‘Your Dreams are Mine Now’(हिंदी अनुवाद: तुम्हारे सपने हुए अपने) इस श्रृंखला की आखिरी कड़ी है. सबसे पहले आया …

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‘समन्वय’ की शुरुआत पर कुछ बातें पॉपुलर पॉपुलर!

आज से इण्डिया हैबिटेट सेंटर के भारतीय भाषा फेस्टिवल ‘समन्वय’ के चौथे सत्र का शुभारम्भ हो रहा है. इस बार ‘समन्वय’ का पहला ही सत्र (कल 2 बजे दोपहर) ‘पल्प-गल्प’ यानी हिंदी के नए लोकप्रिय लेखन को लेकर है. इससे यह समझ में आता है कि हिदी में नए ढंग का …

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खतरनाक सच का सामना है ‘एक भाई का क़त्ल’

‘एक भाई का क़त्ल’शीर्षक से ही लगता है खूनखराबे वाला उपन्यास होगा, जिसमें रहस्य-रोमांच की गुत्थियाँ होंगी. लेकिन तुर्की के युवा लेखक बारिश एम. के इस उपन्यास में अपराध कथा के साथ एक बड़ी सामाजिक समस्या का ऐसा तड़का लगाया गया है कि तुर्की के इस्ताम्बुल की यह कहानी तीसरी दुनिया …

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श्रेष्ठ कृतियों की सूची बनाकर उनका बार-बार अध्ययन करना चाहिए

‘वागर्थ’ पत्रिका के मई अंक में एक परिचर्चा प्रकाशित हुई है ‘समकालीन कथा साहित्य और बाजार’  विषय पर. इसमें मैंने भी सवालों के जवाब दिए थे. पत्रिका के सवालों के साथ अपने जवाब प्रस्तुत कर रहा हूँ. उनके लिए जिन्होंने न पढ़ा हो और जो पढना चाहते हों- प्रभात रंजन  …

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किस्सा पन्ना बाई और जगत ‘भ्रमर’ का!

‘पाखी’ में मेरी एक कहानी आई है। मुजफ्फरपुर के चतुर्भुज स्थान की गुमनाम गायिका पन्ना बाई से जुड़े किस्सों को लेकर। पिछले आठ साल से मैं चतुर्भुज स्थान की गायिकाओं, उस्तादों से जुड़े किस्सों के संकलन एक काम में लगा हुआ हूँ। यह किस्सा उस शृंखला की पहली कड़ी है। …

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बेस्टसेलर! बेस्टसेलर! कहाँ है बेस्टसेलर?

सुरेन्द्र मोहन पाठक के उपन्यास ‘कोलाबा कोन्सपिरेसी’ को हार्पर हिन्दी ने छापा है। यह हिन्दी के प्रकाशन की एक बड़ी परिघटना है जो यह संकेत देती है कि भविष्य में किताबों की दुनिया का क्या ट्रेंड होने वाला है। एक तरफ इसे हिन्दी किताबों से पाठकों को जोड़ने की मुहिम …

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क्रांति-क्रांति-क्रांति, भ्रांति, भ्रांति, भ्रांति!

साहित्य में क्रांति-क्रांति करने वाले हिन्दी लेखक अक्सर सामाजिक क्रांतियों से दूर ही रहते आए हैं। आज ‘प्रभात खबर’ में प्रकाशित मेरा लेख- प्रभात रंजन  ================================ ‘वह (साहित्य) देशभक्ति और राजनीति के पीछे चलने वाली सच्चाई भी नहीं, बल्कि उनके आगे मशाल दिखाती हुई चलने वाली सच्चाई है’– प्रेमचंद द्वारा …

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