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Tag Archives: pramod dwivedi

    प्रमोद द्विवेदी की कहानी ‘माता जी मत कहो प्लीज…’

प्रमोद द्विवेदी की कहानियों की विषयवस्तु और भाषा दोनों का अपना ही अन्दाज़ है। ‘जनसत्ता’ के फ़ीचर संपदक रहे इस लेखक ने कम लिखा है लेकिन इनके लेखन की अलग ही छाप है। उनकी नई कहानी पढ़िए- ==============================  आज मीता जी की किस्मत खराब थी, या कहो दिन ही खोटा …

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प्रमोद द्विवेदी की कहानी ‘मुलतानी काफी  के उस्ताद’

आज पढ़िए हरफ़नमौला लेखक प्रमोद द्विवेदी की  बेजोड़ रसदार कहानी- ======================================   यह कहानी उस्ताद की मौत से ही शुरू होती है। दरअसल सुबह से ही बैगपाइपर ने भौंकना शुरू कर दिया था। वह उस खिड़की के पास ही बैठकर भौंक रहा था, जहां से उस्ताद की मुलतानी काफी का …

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प्रमोद द्विवेदी की कहानी ‘गीता बाली तेरी याद में’

प्रमोद द्विवेदी पत्रकार रहे हैं। जनसत्ता अख़बार में फ़ीचर संपादक। कहानियाँ कम लिखते हैं लेकिन अपने ग़ज़ब की पठनीय कहानियाँ लिखते हैं। उनके किरदार याद रह जाते हैं। यह कहानी पढ़िए- ================== जनवरी की सर्दी में सुबह-सुबह पांच बजे घमंडी यादव का घबराया हुआ फोन आया, ‘गुरु गीता बाली के …

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प्रमोद द्विवेदी की कहानी ‘कामरेड श्रीमान समस्या प्रधान’

प्रमोद द्विवेदी जनसत्ता के फ़ीचर एडिटर रह चुके हैं। संगीत के रसिया हैं और व्यंग्य भाषा में कहानियाँ लिखने में उनका कोई सानी नहीं। यह उनकी नई कहानी पढ़िए- ===================== कामरेड का यह अद्भुत और जिज्ञासापूर्ण नाम दरअसल युवा पत्रकार चंद्रकेश सिन्हा की कथाकार-कवयित्री पत्नी रागिनी सिन्हा तापसे ने रखा …

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प्रमोद द्विवेदी की कहानी  ‘पिलखुआ की जहाँआरा’

‘जनसत्ता’ के फ़ीचर एडिटर रहे प्रमोद द्विवेदी ने अपने कथाकार रूप के प्रति उदासीनता बरती नहीं तो वे अपनी पीढ़ी के सबसे चुटीले लेखक थे। मुझे याद है आरम्भिक मुलाक़ातों में एक बार शशिभूषण द्विवेदी ने उनकी दो कहानियों की चर्चा की थी, जिनमें से एक कहानी यह थी। भाषा …

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