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Tag Archives: priydarshan

पाठ और पुनर्पाठ के बीच दो उपन्यास

आजकल सबसे अधिक हिंदी में समीक्षा विधा का ह्रास हुआ है. प्रशंसात्मक हों या आलोचनात्मक आजकल अच्छी किताबें अच्छे पाठ के लिए तरस जाती हैं. लेकिन आशुतोष भारद्वाज जैसे लेखक भी हैं जो किताबों को पढ़कर उनकी सीमाओं संभावनाओं की रीडिंग करते हैं. इस बार ‘हंस’ में उन्होंने प्रियदर्शन के …

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मैं उर्दू में ग़ज़ल कहता हूं हिंदी मुस्कुराती है

आज हिंदी के दुःख को उर्दू ने कम कर दिया- कल साहित्य अकादेमी पुरस्कार की घोषणा के बाद किसी मित्र ने कहा. मेरे जैसे हजारों-हजार हिंदी वाले हैं जो मुनव्वर राना को अपने अधिक करीब पाते हैं. हिंदी उर्दू का यही रिश्ता है. हिंदी के अकादेमी पुरस्कार पर फिर चर्चा …

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फिर भी कुछ लोग बड़े होते हैं क्योंकि वे दूसरों के लिए खड़े होते हैं

मुझे लगता है सच्ची कविता वह है जो अपने जीवन के बेहद करीब हो, अपने अनुभवों की ऊष्मा उनमें हो। बिना किसी शोर-शराबे के, नारेबाजी के, फतवे के इस तरह से लिखी गई हो कि ठहरकर हमें अपने जीवन-जगत के बारे में सोचने को विवश कर दे। प्रियदर्शन की कविताओं …

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जाल बहेलिया ही बिछा सकता है जानवर नहीं

प्रियदर्शन की ये कविताएं प्रासंगिक भी हैं और बहुत कुछ सोचने को विवश भी करती हैं- ‘जानवरों से हमें माफ़ी मांगनी चाहिए’- जानकी पुल. ===========================  जानवरों से हमें माफ़ी मांगनी चाहिए एक लोमड़ी चालाक होती है, सियार शैतान सांप ख़तरनाक बाघ डरावना गधा मूर्ख घोड़ा तेज़ और कुत्ता वफ़ादार, ये …

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उनके गीत कभी पुराने नहीं पड़े

शमशाद बेगम को श्रद्धांजलि देते हुए प्रसिद्ध लेखक-पत्रकार प्रियदर्शन का यह लेख उनकी गायकी के महत्व को रेखांकित करता है. प्रियदर्शन ने यह लेख ख़ास तौर पर जानकी पुल के लिए लिखा है, जानकी पुल उनके प्रति आभार व्यक्त करता है- जानकी पुल. =================================== आम तौर पर हिंदी फिल्मों में …

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