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Tag Archives: satyanand nirupam

अनुपम मिश्र का लेख ‘तैरने वाला समाज डूब रहा है’

आज सत्यानंद निरुपम जी ने फ़ेसबुक पर अनुपम मिश्र के इस लेख की याद दिलाई तो मुझे ‘जनसत्ता’ के वे दिन याद आ गए जब एडिट पेज पर हमने यह लेख प्रकाशित किया था, याद आई अशोक शास्त्री जी की जिनसे घंटों घंटों इस लेख को लेकर चर्चा होती थी। …

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‘पॉपुलर की हवा’ और ‘साहित्यिक कहलाए जाने की ज़िद’ के बीच हिंदी लेखन

राजकमल प्रकाशन समूह के संपादकीय निदेशक सत्यानंद निरुपम निस्सन्देह इस समय हिंदी के ऐसे चुनिंदा संपादक हैं जो हिंदी के नए और पुराने दोनों तरह के लेखकों-पाठकों के महत्व को समझते हैं और हिंदी में अनेक नए तरह के नए बदलावों के अगुआ रहे हैं। पढ़िए उनसे समकालीन लेखन और …

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राजकमल प्रकाशन का 70वां साल और सहयात्रा का उत्सव

हिंदी साहित्य के पर्याय की तरह है राजकमल प्रकाशन. पुस्तकों को लेकर नवोन्मेष से लेकर हिंदी के क्लासिक साहित्य के प्रकाशन, प्रसार में इन सत्तर सालों में राजकमल ने अनेक मील स्तम्भ स्थापित किये हैं. सहयात्रा के उत्सव के बारे में राजकमल प्रकाशन के सम्पादकीय निदेशक सत्यानन्द निरुपम के फेसबुक …

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हे दीनानाथ, सबको रौशनी देना!

युवा संपादक-लेखक सत्यानन्द निरुपम का यह लेख छठी मैया और दीनानाथ से शुरू होकर जाने कितने अर्थों को संदर्भित करने वाला बन जाता है. ललित निबंध की सुप्त परम्परा के दर्शन होते हैं इस लेख में. आप भी पढ़िए- मॉडरेटर =============== छठ-गीतों में ‘छठी मइया’ के अलावा जिसे सर्वाधिक सम्बोधित …

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सत्यानन्द निरुपम से नीता गुप्ता की बातचीत

हिन्दी प्रकाशन के क्षेत्र में हाल के वर्षों में जिन कुछ लोगों ने संपादक की संस्था को मजबूत बनाया है उनमें सत्यानंद निरुपम का नाम प्रमुख है। हाल में ही हिन्दी के सबसे बड़े प्रकाशन ब्रांड राजकमल प्रकाशन समूह में संपादकीय निदेशक के रूप में काम करते उनको पाँच साल पूरे …

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सत्यानंद निरुपम से बातचीत

सत्यानंद निरुपम से आप असहमत हो सकते हैं, उससे लड़ सकते हैं लेकिन आप उसको खारिज नहीं कर सकते. वह हिंदी संपादन में न्यू एज का प्रतिनिधि है, कुछ लोग नायक भी कहते हैं. लेकिन हिंदी पुस्तकों की दुनिया की बंद गली के आखिरी मकान का दरवाजा खोलने और ताजा …

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रवीश कुमार की कहानी ‘स्मार्ट सिटी विद 32GB’

रवीश कुमार की यह संभवतः पहली कहानी है. उनकी सम्मोहक भाषा के हम सब कायल रहे हैं. जो है उससे अलग करने की जबरदस्त प्रतिबद्धता उनके काम में दिखाई देती है, इसलिए वे जो भी करते हैं अलग दिखाई देता है. इस कहानी को भी उनकी छवि, उनके ग्लैमर से …

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भोजपुरी और हिंदी के बीच का कवि केदार

कुछ लेखक-कवि ऐसे होते हैं जिनका सम्मान उस भाषा-समाज का सम्मान भी होता है जिसके जन उनको अपनी बोली-बानी का प्रतिनिधि मानते हैं. केदारनाथ सिंह ऐसी ही कवि हैं. उनको ज्ञानपीठ पुरस्कार मिलने पर उनसे उनकी कविताओं को लेकर आत्मीय, सहज बातचीत की युवा लेखक-कवि सत्यानन्द निरुपम ने. आज ‘दैनिक …

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अमलतास के फूल खिल चुके

आज सत्यानन्द निरुपम की कविताएँ. वे मूलतः कवि नहीं हैं, लेकिन इन चार कविताओं को पढकर आपको लगेगा की वे भूलतः कवि भी नहीं हैं. गहरी रागात्मकता और लयात्मकता उनकी कविताओं को एक विशिष्ट स्वर देती है, केवल पढ़ने की नहीं गुनने की कविताएँ हैं ये. इस विचार-आक्रांत समय में …

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