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Tag Archives: tripurari kumar sharma

अभी-अभी एक सितारा टूटकर गिरा है

वेस्टलैंड-यात्रा बुक्स ने जब कहानी 140 यानी ट्विटर कहानी प्रतियोगिता की घोषणा की तो उम्मीद नहीं थी कि हिंदी के लेखक ऐसा प्रयास करेंगे, लेकिन अनेक लेखकों ने ट्विटर पर कहानी लिखकर इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया. पहले दिन पुरस्कार पाने वाले लेखकों में युवा लेखक त्रिपुरारि कुमार शर्मा भी …

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जब एक क़ज़ा से गुज़रो तो इक और क़ज़ा मिल जाती है

उम्र से लम्बी सड़कों पर ‘गुलज़ार’ 19 जनवरी की शाम गुलज़ार रही, गुलज़ार के नाम रही। मौक़ा था कवि-चिकित्सक विनोद खेतान लिखित पुस्तक “उम्र से लम्बी सड़कों पर गुलज़ार” के लोकार्पण का। ‘वाणी’ से प्रकाशित इस पुस्तक में लेखक ने बड़े आत्मीय ढंग से गुलज़ार के फ़िल्मी गीतों की परतों …

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जब इंडिया गेट के माथे पर मोमबत्तियाँ जलती हैं

युवा कवि त्रिपुरारि कुमार शर्मा की ये कविताएँ हमें कुछ सोचने के लिए विवश कर देती हैं, हमारी मनुष्यता पर सवाल उठती हैं- जानकी पुल. ============================      1. वाल ऑफ़ डेमोक्रेसी   जब इंडिया गेट के माथे पर मोमबत्तियाँ जलती हैं  तो उसकी सुगंध में सनक उठता है ‘जंतर-मंतर’ …

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इतने वर्षों तक ‘चुप’ रहने के लिए कोई अनुबंध हुआ था?

‘पाखी’ में प्रकाशित वरिष्ठ लेखक श्रवण कुमार गोस्वामी के लेख की एक दिलचस्प रीडिंग की है युवा कवि-लेखक त्रिपुरारि कुमार शर्मा ने- जानकी पुल. =================================== ‘पाखी’ (अंक-3, दिसंबर-2012) का पन्ना-दर-पन्ना पलटने पर पता चलता है कि एक वरिष्ठ लेखक एक युवा लेखिका से कुछ-कुछ नाराज़ जैसा है। बात महज इतनी-सी …

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मैं पुरस्कारों को गम्भीरता से नहीं लेता

हाल में ही युवा कथाकार चंदन पांडे का कहानी संग्रह पेंगुइन से आया है ‘इश्कफरेब’. इस अवसर पर प्रस्तुत है उनसे एक बातचीत. यह बातचीत की है युवा कवि त्रिपुरारि कुमार शर्मा ने- जानकी पुल. === === ===  त्रिपुरारि : चंदन जी, पहले तो आपकी नई किताब ‘इश्क़फ़रेब’ के लिए …

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गुवाहाटी के गले से चीख निकली है

युवा कवि त्रिपुरारि कुमार शर्मा की कविता. इसके बारे में अलग से कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है, कविता अपने आप में सब बयान कर देती है- जानकी पुल. =========================================================गुवाहाटी के गले से चीख निकली है  चीख, जिसमें दर्द है, घुटन भी है चीख, जिसमें रेंगती चुभन भी है चीख, …

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क्या यह नामवर जी का अपमान नहीं?

गौरव-सोलंकी-ज्ञानपीठ प्रकरण ने यह साबित कर दिया है कि हिंदी में पुरस्कार देने वाली संस्थाएं निर्णायक मंडल को कितना महत्व देती हैं. जिस निर्णायक मंडल ने गौरव सोलंकी को पुरस्कार दिया था, उसके कहानी संग्रह को छापने की संस्तुति दी थी उसके अध्यक्ष थे मूर्धन्य आलोचक नामवर सिंह, सदस्यों में …

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न तो कौरव के साथ हूं और न ही गौरव के साथ

‘ग्यारहवीं ए के लड़के’ के बहाने युवा लेखक त्रिपुरारि कुमार शर्मा- जानकी पुल. —————————————————————————- मेरे लिए युवा लेखक गौरव सोलंकी जितने परिचित/अपरिचित हैं, उतने ही भारतीय ज्ञानपीठ के तथा–कथित आका (मैं सोचने में असमर्थ हूँ कि किसका नाम लिखना चाहिए) एण्ड कम्पनी। दोनों में से किसी को भी मैं व्यक्तिगत …

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भगत सिंह! कुछ सिरफिरे-से लोग तुमको याद करते हैं

भगत सिंह की शहादत को प्रणाम के साथ कुछ कविताएँ युवा कवि त्रिपुरारि कुमार शर्मा की- जानकी पुल. ——————————– भगत सिंह के लिए भगत सिंह! कुछ सिरफिरे-से लोग तुमको याद करते हैं जिनकी सोच की शिराओं में तुम लहू बनकर बहते हो जिनकी साँसों की सफ़ेद सतह पर वक़्त-बेवक़्त तुम्हारे …

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और प्रेम का रहस्यमय कंकाल गाता है

1911 में अमेरिका में पैदा हुए कवि केनेथ पैटचेन के बारे में कहा जाता है कि बाद में ‘बीट पीढ़ी’ के कवियों ने उनको अपने आदर्श के रूप में अपनाया. मूलतः विद्रोही स्वभाव के इस कवि के बारे में कहा जाता है कि अपने समय में उनको ठीक तरह से …

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